हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए ऐसे सेमिनार अत्यंत महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री धामी

हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए ऐसे सेमिनार अत्यंत महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री धामी
Spread the love

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य–नागरिक समन्वय जैसे विषयों पर आयोजित सेमिनार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेमिनारों से निकलने वाले सुझाव न केवल देश की सामरिक नीति को और अधिक मजबूत करेंगे, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, सीमित जनसंख्या और दुर्गम इलाकों की चुनौतियों को देखते हुए सेना, स्थानीय नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं, जो वास्तव में राष्ट्र की आंख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने सीमांत गांव माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने माणा को “देश का अंतिम गांव” कहने के स्थान पर “देश का प्रथम गांव” बताया, जो सीमांत क्षेत्रों के प्रति सरकार की सोच को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और वहां के नागरिकों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र की सीमा से जुड़ी चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण, तकनीकी उन्नयन तथा अवसंरचनात्मक विकास के महत्व पर अपने विचार रखे।

सेमिनार में राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और संबंधित क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

Related articles