टिहरी गढ़वाल के मुख्य शिक्षा अधिकारी एस.पी. सेमवाल ने दिया इस्तीफा, पदोन्नति में देरी से नाराजगी

टिहरी गढ़वाल के मुख्य शिक्षा अधिकारी एस.पी. सेमवाल ने दिया इस्तीफा, पदोन्नति में देरी से नाराजगी
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टिहरी।टिहरी गढ़वाल के मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री एस.पी. सेमवाल ने उत्तराखण्ड शासकीय सेवा से त्यागपत्र देने का फैसला किया है। उन्होंने यह कदम अपर निदेशक पद पर पिछले आठ महीनों से लंबित पदोन्नति और इस संबंध में स्पष्ट कारण न मिलने से उत्पन्न हताशा के चलते उठाया है।

23 सितम्बर 2025 को सचिव, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन, श्री रविनाथ रमन (IAS) को संबोधित अर्द्धशासकीय पत्र में श्री सेमवाल ने अपनी 26 वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा का उल्लेख किया। उन्होंने 27 मार्च 1999 से शुरू अपनी शैक्षिक प्रशासन की यात्रा में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए, जिनमें राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की स्थापना (2002) और उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार करना (2004) शामिल हैं।

श्री सेमवाल ने 2002 में देहरादून के ननूरखेड़ा में राज्य के पहले राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की स्थापना के लिए नोडल अधिकारी के रूप में कार्य किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 9 नवम्बर 2002 को इस विद्यालय का शिलान्यास किया गया था। इस परिसर में आज IGNOU कार्यालय, SCERT (10 वर्ष तक), और Virtual Studio संचालित हो रहे हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें स्थानीय लोगों और तत्कालीन श्रम व परिवहन मंत्री श्री हीरा सिंह बिष्ट के विरोध का भी सामना करना पड़ा।

वर्ष 2004 में श्री सेमवाल को निदेशक, विद्यालयी शिक्षा द्वारा उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के इण्टरमीडिएट एक्ट-1921 और बेसिक शिक्षा अधिनियम-1972 को एकीकृत कर यह अधिनियम तैयार किया। साथ ही, विभिन्न संवर्गों (मिनिस्टीरियल, प्रारम्भिक शिक्षा, प्रशिक्षित स्नातक, प्रवक्ता, निरीक्षक, प्रधानाचार्य, निदेशक) के लिए सेवा नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया, जिसके आधार पर प्रारम्भिक शिक्षा का राजकीयकरण संभव हुआ।

पत्र में श्री सेमवाल ने बताया कि फरवरी 2025 में घोषित रिक्तियों के बावजूद उनकी अपर निदेशक पद पर पदोन्नति नहीं हो सकी। इस देरी का कोई समुचित कारण न बताए जाने से उनकी हताशा बढ़ी। उन्होंने कहा कि विभाग कर्मचारियों से समयबद्ध प्रकरण निस्तारण की अपेक्षा करता है, लेकिन उनकी स्वयं की आकांक्षाओं का कोई समाधान नहीं हुआ।

श्री सेमवाल ने पत्र के अंत में विनम्रतापूर्वक शासकीय सेवा से मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह पत्र शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और समयबद्धता की कमी जैसे मुद्दों को उजागर करता है।

उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग में इस त्यागपत्र के प्रभाव और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

देवभूमि खबर

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