देहरादून।शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से उत्तराखंड शासन ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा जारी आदेश के तहत सभी विभागों, निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, खंड विकास कार्यालयों तथा राजकीय शैक्षणिक एवं चिकित्सीय संस्थानों में यह व्यवस्था लागू होगी।
जारी एसओपी के अनुसार सभी कार्यालय परिसरों में प्रवेश एवं पहचान की सख्त व्यवस्था की जाएगी। आगंतुकों को कार्यालय में प्रवेश से पूर्व रिसेप्शन पर पंजीकरण कराना होगा तथा वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जाएगा, जहां संभव न हो वहां भौतिक रजिस्टर में आगंतुकों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। सत्यापन के उपरांत टाइम-स्टैम्प्ड क्यूआर/आरएफआईडी आधारित पास जारी किया जाएगा, जो केवल निर्धारित ‘मीटिंग जोन’ तक ही मान्य होगा।
सुरक्षा जांच के अंतर्गत प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) लगाए जाएंगे तथा संदिग्ध व्यक्तियों की फ्रिस्किंग की जाएगी। आम जनता के वाहनों का कार्यालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, जबकि वीआईपी अथवा दिव्यांगजन के वाहनों को जांच उपरांत अनुमति दी जाएगी।
एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों के कक्ष में एक समय में सीमित संख्या में ही व्यक्तियों को प्रवेश मिलेगा। दो से अधिक व्यक्तियों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक ‘कॉन्फ्रेंस रूम’ में की जाएगी, जहां अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे स्थापित होंगे।
कार्यालय परिसरों में उच्च गुणवत्ता (HD) के सीसीटीवी कैमरे ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित लगाए जाएंगे तथा फुटेज का न्यूनतम 90 दिनों तक सुरक्षित बैकअप रखा जाएगा। अधिकारियों की सुरक्षा के लिए उनके कक्षों एवं रिसेप्शन पर साइलेंट पैनिक अलार्म भी स्थापित किए जाएंगे।
एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, दुर्व्यवहार या लोक सेवकों के साथ मारपीट की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। घटना के बाद साक्ष्यों की सुरक्षा (चेन ऑफ कस्टडी) सुनिश्चित की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज जांच अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
शासन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि आगंतुकों के लिए ‘डूज़ एंड डोंट्स’ कार्यालय परिसर में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें तथा वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी सुनिश्चित किया जाए।
इस नई व्यवस्था से शासकीय कार्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की अपेक्षा की जा रही है।

