उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद डॉक्टर भी अब लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने अब इसके लिए आयुर्वेद के डॉक्टरों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.
फैसले के अनुसार आयुर्वेद विभाग के तहत कार्यरत 2800 आय़ुष डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग में भेज दिया गया है.
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि 2800 आयुष चिकित्सकों की तैनाती अब प्राथमि स्वास्थ्य केंद्र यानी पीएचसी पर कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार ने फैसला किया है कि आयुष चिकित्सकों को सामान्य एलोपैथिक दवाएं लिखने का भी अधिकार दिया जाए.
इसके लिए करीब 15 दवाएं ऐसी हैं, जो सामान्य तौर पर इस्तेमाल होती हैं. ये आयुष डॉक्टर अब इसे भी मरीजों को लिख सकेंगे.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि हम जल्द ही चिकित्सकों की कमी को पूरा कर लेंगे.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किराए पर चलने वाले आयुर्वेदिक हॉस्पिटल बंद किए जाएंगे. हमने पिछले 7 महीने में डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक कम किया है. इसके तहत कई निर्णय लिए गए हैं, जिनमें 1000 एमबीबीएस डॉक्टरों को संविदा पर नियुक्त करने का फैसला भी शामिल है.

