सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीकरण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज हुआ समापन

सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीकरण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का आज हुआ समापन
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चमोली।सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड़ गवर्नेंस उत्तराखण्ड नियोजन विभाग एवं यूएनडीपी के तत्वाधान में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीकरण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। संस्था ईएचआई (इंटरनेशनल इनेबलिंग हेल्थकेयर) के तकनीकी सहयोग से स्थापित कार्यशाला में सीपीपीजीजी के विशेषज्ञ करूणाकर सिंह, माॅनिटरिंग विशेषज्ञ शैलेन्द्र कुमार एवं लाइवलीहुड प्रोफेशनल परधी कपूर ने जनपद स्तरीय सभी विभागों को सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीरकण विषय पर एसडीजी के लक्ष्यों के बेहतर तरीके से हासिल करने के संबध में प्रजेंटेशन दिया और जनपद स्तर पर उपलब्ध संशाधनों एवं इंडिकेटर्स के आधार पर आने वाली समस्याओं को चिन्हित करते हुए उनके प्रवाभी समाधान पर चर्चा की । विभागों के पास कितने रिसोर्सेज है और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए क्या मैकेनिज्म रहेगा इन सब बातों पर भी कार्यशाला में विस्तार से चर्चा हुई।
 

जनपद के सतत् विकास लक्ष्यों के स्थानीय स्तर पर नियोजन एवं क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार से क्लेक्ट्रेट सभागार में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने समापन किया। सीडीओ ने सीपीपीजीजी एवं यूएनडीपी की पूरी टीम एवं विभागीय अधिकारियों को कार्यशाला के सफल आयोजन पर बधाई भी दी। कहा कि कार्यशाला के आउटकम से जनपद के सतत् विकास के लिए कार्ययोजना एवं विकास का रोडमैप के साथ जनपद के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2030 तैयार हो सकेगा। सीडीओ ने कहा कि सतत विकास के सभी लक्ष्यों का अपना महत्व है। इन लक्ष्यों की सफलता स्थानीय स्तर पर बनाए जाने वाले बेहतर प्लान और उसके कारगर इम्प्लिमेंटेशन से ही संभव होगा। उन्होने विभागों को अपनी ताकत और कमजोरी को पहचानकर सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में अपनी सक्रिय भूमिका से कार्य करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक सतत् विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विभागों को अपने अनुभव, फीडबैक और आपसी परिचर्चा के बाद निकले बेहतर आउटकम और उसके बेहतर क्रियान्वयन से ही संभव होगा। 

जनपद के सतत् विकास को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में 17 विकास लक्ष्यों के अन्तर्गत 169 सूक्ष्म लक्ष्यों पर परिचर्चा हुई। जिसमें गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, महिलाओं व बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराना, सभी को न्याय संगत शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से सबको अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, रोजगार के लिए कौशल विकास के कार्यक्रम चलाना, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना, स्वच्छता को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बढ़ावा देना, कमजोर वर्गों का सुसंगत न्याय उपलब्ध कराना, आवास की सुविधा उपलब्ध कराना, औद्योगिक गतिविधियों के द्वारा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर सभी नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन निर्वहन करने से संबधित विषयों पर गहनता से चर्चा की गई और इनको विभिन्न योजनाओं एवं जन भागीदारी के माध्यम से प्राप्त करने का समन्वित प्रयास करने पर परिचर्चा की गई। लाइवलीहुड, मानव विकास, समाजिक उत्थान एवं जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर इनपुट लेने के लिए संबधित विभागीय अधिकारियों के चार गु्रप बनाकर इनपुट लिए गए। इस इनपुट के आधार पर जनपद का ड्राफ्ट रिपोर्ट विजन-2030 तैयार कर सीपीपीजीजी जिले को भेजेगा। जिले में गठित एसडीजी टास्कफोर्स के माध्यम से इस पर परिचर्चा के बाद इसको अंतिम रूप दिया जाएगा। जो आने वाले 10 वर्षो के लिए विकास कार्यो के लिए रोडमैप का काम करेगा और इसी के आधार पर जनपद के सतत् विकास को दिशा प्रदान की जाएगी।

कार्यशाला में सीपीपीजीजी के विशेषज्ञ करूणाकर सिंह, माॅनिटरिंग विशेषज्ञ शैलेन्द्र कुमार, लाइवलीहुड प्रोफेशनल परधी कपूर, तकनीकी संस्था ईएचआई देहरादून से डा0 अनिल कुमार डिमरी, डा0 अजीत गैरोला, डा0 गजेन्द्र सिंह राणा सहित जनपद के सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास, वन, कृषि, उद्यान, उद्योग, मत्स्य, पर्यटन, आपदा, नगर निकाय आदि रेखीय विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

देवभूमि खबर

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