गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रांगण में फलदार और औषधीय पौधों का हुआ रोपड़
हरिद्वार।देवभूमि खबर। भारत विकास परिषद पंचपुरी शाखा ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय भवन के प्रांगण एवं दयानन्द स्टेडियम में फलदार और औषधीय पौधों का भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति एवं सभ्यता वनों से ही पल्लवित और विकसित हुई है। वृक्षारोपण से प्रकृति का संतुलन बना रहता है। वृक्ष अगर न हो तो सरोवर न ही जल से भरी मिलेगी और सरिता की कल-कल की ध्वनि से प्रभावित हुई वृक्षों की जड़ों से वर्षा ऋतु का जल धरती के अन्त में पहुंचता है। वृक्ष हमें जल स्रोतों में गमन करके हमें अपर जलराशि प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो0 विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने वृक्षों की छांव में बैठकर ही चिन्तन मनन के साथ ही ज्ञान के भण्डार को मानव को सौंपा है। वैदिक ज्ञान के वैराग्य में आरण्यक ग्रन्थों का विशेष स्थान है। वनों की ही गोद में ही गुरुकुलों की स्थापना की गयी थी। उन गुरुकुलों में अर्थशास्त्री, दार्शनिक तथा राष्ट्र निर्माण शिक्षा ग्रहण करते थे। इसीलिए वृक्षारोपण करना अत्यन्त आवश्यक है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो0 दिनेश भट्ट ने कहा कि हमारे भारत में जहां भी वृक्षारोपण का कार्य होता है वहीं इन्हें पूजा भी जाता है। कई ऐसे वृक्ष है जिन्हें हमारे हिन्दु धर्म में ईश्वर का निवास माना गया है। जैसे नीम, पीपल, आंवला, बरगद इत्यादि, जो शास्त्रों के अनुसार पूज्यनीय कहलाते हैं। गुरुकुल एक ऐसी संस्था है जहां पर घनघोर वृक्ष है तथा हरियाली की और बढ़ाने के लिए भारत विकास परिषद पंचपुरी द्वारा वृक्षारोपण कार्य किया गया है वह संस्था बधाई के पात्र है। इस कार्यक्रम में प्रो0 ईश्वर भारद्वाज, प्रो0 एस0के0 श्रीवास्तव, प्रो0 आर0के0एस0 डागर, प्रो0 एल0पी0 पुरोहित, प्रो0 डी0एस0 मलिक, प्रो0 ब्रह्मदेव, प्रो0 पी0पी0 पाठक, संयुक्त कुलसचिव देवेन्द्र कुमार, डा0 राकेश गिरि, डा0 महेन्द्र असवाल, डा0 शिव कुमार चैहान, डा0 अजय मलिक, डा0 विपिन कुमार शर्मा, डा0 मयंक अग्रवाल, द्विजेन्द्र पन्त, तरशेम लाल शर्मा, कपिल गोयल, अश्वनी जांगडा, डा0 पंकज कौशिक, डा0 संगीता विद्यालंकार, डा0 अरूण कुमार, पवन कुमार एवं विश्वविद्यालय के बी0पी0एड0, एम0पी0एड0, एन0सी0सी0 के छात्रों ने अपनी सहभागिता निभाई।

