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तम्बाकू उत्पादों के सेवन तथा सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर वैधानिक कार्यवाही के निर्देश

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पौड़ी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखण्ड व जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल के निर्देशन पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी पौड़ी डा. मनोज बहुखण्डी ने सार्वजनिक स्थलों पर धुम्रपान एवं धुम्रपान रहित तम्बाकू, थूकने पर संबंधित के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश जारी किया। जन-स्वास्थ्य की रक्षा तथा कोविद 19 संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य के सभी सरकारी/गैर सरकारी कार्यालय एवं परिसर, सभी शैक्षणिक संस्थानों एवं परिसर, सभी थाना व परिसर, सार्वजनिक स्थल विधि के अनुसार किसी भी प्रकार का तम्बाकू पदार्थ यथा सिगरेट, बीडी, खैनी, गुटखा, पान मशाला आदि के उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस प्रशासन, नागर निकाय, संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कडाई से अनुपालन करने का कहा गया।
वर्तमान समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा नोवेल कोरोना वायरस ( COVID 19 ) को विश्वव्यापी महामारी घोषित किया गया है। पूरें भारत सहित उत्तराखण्ड राज्य में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। कोविद 19 एक संक्रामक बीमारी है। जो कि छींकने, खासने, बोलने या थूकने की प्रक्रिया में मुख्य या नाक से निकलने वाली ड्रोपलेट के माध्यम से फैलता है। सरकार तथा प्रशासन कोरोना संक्रमण को रोकने में निरंतर कार्य कर रहे है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, भारत सरकार द्वारा आम जनमानस में ‘‘ Not to consume and spit Smokeless Tobacco in Public ’’ की अपील की गई है। अपील में धुम्रपान मुक्त तम्बाकू चबाने से बनने वाले थूक तथा सार्वजनिक स्थानों में थूकने से कोरोना वायरस संक्रमण फैलले के बारे में भी उल्लेख किया गया है।
कोरोना वायरस के फैलने में तम्बाकू उपयोग की भूमिका तथा सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का तम्बाकू उत्पादों (धुम्रपान तथा धुम्रपान रहित) के उपयोग निषेध किया गया है। उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित के विरूद्ध दण्डात्मक वैधानिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।
आई.पी.सी. की धारा 268 या 269 के अनुसार कोई भी व्यक्ति यदि ऐसा विधि विरूद्ध अथवा अपेक्षा पूर्ण कार्य करेगा, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का फैलना संभाव्य हो, उस व्यक्ति को 6 माह तक की अवधि तक का कारावास से दण्डित किया जा सकता है। जबकि कोटपा 2003 की धारा 4 के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर धुम्रपान निषेध तथा उल्लंघन की स्थिति में 200 रूपया तक के जुर्माना तथा उत्तराखण्ड कूड़ा फैकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम 2016 की धारा 3(ञ) व धारा 4 (झ) को थूकने को आपराधिक माना गया है व धारा 9 के अनुसार दोष सिद्ध होने पर 5000 रूपया का अर्थ दण्ड या 6 माह का कारावास या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
जन-स्वास्थ्य की रक्षा तथा कोविद 19 संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य के सभी सरकारी/गैर सरकारी कार्यालय एवं परिस, सभी शैक्षणिक संस्थानों एवं परिसर, सभी थाना व परिसर, सार्वजनिक स्थल विधि के अनुसार किसी भी प्रकार का तम्बाकू पदार्थ यथा सिगरेट, बीडी, खैनी, गुटखा, पान मशाला आदि के उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।

देवभूमि खबर

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