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पहाडों के दिव्यांग, गरीब, बेसहारा बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देने में प्राचार्य की भूमिका अतुलनीय है

पहाडों के दिव्यांग, गरीब, बेसहारा बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देने में प्राचार्य की भूमिका अतुलनीय है
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देहरादून ।शिक्षा का मतलब अक्षर ज्ञान ही नहीं बल्कि देशभक्त, ईमानदार, समाजसेवी, जागरूक इंसान बनाना भी है। इस उद्देश्य को लेकर समर्पित उत्तराखंड के राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए गए पूर्व माध्यमिक आवासीय विद्यालय राजपुर रोड के प्रधानाचार्य हुकुम सिंह उनियाल की सेवानिवृत्ति पर न्योविजन संस्था द्वारा विद्यालय मे आयोजित समारोह में उद्गार व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा पहाड़ों के दिव्यांग, गरीब, बेसहारा बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देने में प्राचार्य की भूमिका अतुलनीय है।

वक्ताओं ने कहा वर्षों से संचालित विद्यालय को संसाधन युक्त बनाने में सामाजिक संस्थाओं के दान वीरों ने भी समय-समय पर संसाधन उपलब्ध कराकर बच्चों का भविष्य बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है जिसके प्रेरणास्रोत प्रधानाचार्य उनियाल है।सेवानिवृत्त उनियाल ने कहा उन्हे अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अपनी पत्नी बच्चों का भी भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ जिससे वह अपनी शैक्षिक तथा सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर सके।

इस अवसर पर संयुक्त नागरिक संगठन के ब्रिगेडियर के जी बहल,मैती संस्था के पदश्री कल्याण सिंह रावत, आचार्य विपिन जोशी सुशील त्यागी सर्वोदय के बीजू नेगी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मनोज ध्यानी, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण समिति के मुकेश शर्मा, क्षत्रिय चेतना मंच के आर एस कैंतूरा, पेंशनर संगठन के चौधरी ओमवीर सिंह, न्यूविजन के गजेंद्र रमोला, सहित विद्यालय के शिक्षकों कार्मिकों ने प्राचार्य उनियाल को शॉल उड़ाकर पुष्पों की माला पहनाकर तथा पुष्पगुच्छ सम्मान पत्र आदि देकर उनका अभिनंदन किया।

देवभूमि खबर

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