ब्रह्मलीन स्वामी राधाकृष्ण महाराज त्याग एवं तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति थे: सतपाल ब्रह्मचारी
हरिद्वार।देवभूमि खबर। म.म.स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा है कि संतों का जीवन समाज में सद्भाव का वातावरण बनाकर सन्मार्ग की प्रेरणा हेतु समर्पित रहता है और संत महापुरूषों ने सदैव राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधकर उन्नति की ओर अग्रसर किया है। भूपतवाला स्थित थानाराम आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी राधाकृष्ण महाराज की पुण्यतिथी पर आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरूषों के उपदेश सदैव प्रेरणादायी होते हैं। स्वामी सतपाल ब्रह्मचारी महाराज ने सदा अपने गुरूजनों की सेवा की और उनके द्वारा चलाए जा रहे सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ाया। स्वामी उमेश मुनि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी राधाकृष्ण महाराज एक महान संत थे। मानव कल्याण में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। भारतीय सनातन संस्कृति व धर्म प्रचार में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान किया। स्वामी सतपाल ब्रह्मचारी अपने गुरू के बताए मार्ग पर चलते हुए उनके अधूरे कार्यो को जिस प्रकार पूर्ण कर रहे हैं वह प्रशंसनीय है। इस अवसर पर महंत प्रेमदास, महंत विष्णुदास, राजमाता आशा भारती, शिवम महंत, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी चिदविलासानंद, महंत सूरज दास, महंत सच्चिदानंद, महंत दुर्गादास, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, स्वामी शिवानंद भारती, स्वामी ललितानंद, महंत जमनादास, स्वामी लाल बाबा, स्वामी कमलदास, राजेश शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, डा. सुनील शर्मा, चंद्रपाल शर्मा, देवांश शर्मा, अनन्या शर्मा आदि सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष उपस्थित रहे।

