डेंगू के रोग से बचाव के लिए दी गयी जानकारी

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देहरादून।देवभूमि खबर। पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डाॅ एल.एम उप्रेती की पहल पर गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय में मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ एस.के गुप्ता की अध्यक्षता में डेंगूरोधी अभियान 2019 के सम्बन्ध में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में डाॅ उप्रेती, डा0 रमोला, डाॅ के.के सिंह, डाॅ गोयल, डाॅ आर.के सिंह, डाॅ योगन्द्र, डाॅ0 चौहान, डाॅ पंवार, डाॅ एन एस खत्री एवं वैक्टर जनित रोग अधिकारी देहरादून सुभाष जोशी द्वारा डेंगू द्वारा रोग से बचाव हेतु कार्ययोजना 2019 के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी।
गोेष्ठी में विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए बताया कि डेंगू बरसात के मौसम में माह जुलाई से अक्टूबर तक फैलता है। डेंगू के लक्षणों के बारें में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि डेंगू में अचानक तेज सिर दर्द व बुखार होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में तेज दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढता है, जी मचलाना एवं उल्टी होना, गंभीर मामलों में नाक, मुह , मसूड़े से खून आना अथवा त्वचा पर चकते उभरना है, प्रमुख है। उन्होंने डेंगू से बचने के उपायों की जानकारी देते हुए बताया कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर रूके हुए साफ पानी में पनपता है, जैसे कूलर का पानी, खुली पानी की टंकी, पक्षियों व पशुओं के पीने के पानी का बर्तन, फ्रीज की टैª, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तन, टायर, डिस्पोजल बर्तन-गिलास दोने इत्यादि। उन्होंने पानी से भरे हुए बर्तनों व टंकियों आदि को ढक कर ही रखनें, प्रत्येक सप्ताह कूलर को खाली करके सुखा कर ही उपयोग में लानें की बात कही। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि डेंगू मच्छर दिन के समय ही काटता है ऐसे में पूरी बाजू के कपड़े पहनना चाहिए जिससे पूरा शरीर ढका रहे। उन्होंने मच्छर रोधी क्रीम, क्वाईल, रिपेलेन्ट आदि का यथासम्भव उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा व वैक्सीन नही होती है। बुखार उतरने के लिए पैरासीटामोल लिया जा सकता है। एस्प्रीन या इबुब्रेफेन का इस्तेमाल न किया जाय। उन्होंने बताया कि डेंगू के रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है ऐसी स्थिति होने पर चिकित्सक की सलाह ली जाय। उन्होनें कहा कि सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, घर में कीटनाशक का छिड़काव करें, अनावश्यक एकत्र पानी में जला हुआ मोबिल आॅयलध्मिट्टी का तेल डाल दें, उन्होंने बताया कि डेंगू की एलाईजा जांच दून मेडिकल कालेजध्अस्पताल में निःशुल्क की जाती है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त लक्षण होने पर गर्भवती महिलाओं एवं 1 साल से छोटे बच्चों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवा दें। गोष्ठी में प0 दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय, संयुक्त चिकित्सालय रायपुर, नगर निगम देहरादून के चिकित्साधिकारी, पर्यवेक्षक एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।

देवभूमि खबर

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