पहाड़ की पीड़ा खींच लाई: भावना पांडे

पहाड़ की पीड़ा खींच लाई: भावना पांडे
Spread the love

राजेन्द्र सिंह नेगी

देहरादून।पहाड़ों से पलायन रोजगार को लेकर बड़े बड़े दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन इन सबके बाद भी पहाड़ो में पलायन और रोजगार इतिहास के पन्नो में सिमट कर रह गया है। पहाड़ से प्रेम रखने वाले प्रवासी पहाड़ की पीड़ा को समझते हुए रोजगार को लेकर उत्तराखंड की ओर रूख कर रहे हैं ।

मूल रूप से हल्द्वानी (नैनीताल) निवासी भावना पांडे, आज किसी परिचय की मोहताज नहीं। भावना पांडे का मानना है कि राज्य को एक नया विकल्प देने और शहीदों के सपनों को साकार करने के लिये सभी आंदोलनकारियों, बुद्धिजीवियों, मातृशक्ति, युवाओं और राज्य हितैषियों को एक मंच पर लाना होगा।
द ग्लोबल गॉड मदर फाउंडेशन की संचालिका भावना पांडे ने मुलाकात के दौरान, देवभूमि जनसेेवा ग्रुप को बताया कि महज 16 वर्ष की अल्पायु में उन्हें उत्तराखंड से पलायन को विवश होना पड़ा और 31 वर्ष संघर्ष करने के बाद उत्तराखंड लौटी। पलायन का दर्द समझती हैं, इसिलिये सवाल उठाती हैं कि
आखिर क्यों स्थानीय लोगों को प्रदेश में रोजगार नहीं मिल पाता ? क्यों, पहाड़ में आज तक भी उचित शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बना हुआ है ?
क्यों, दूर दराज के ग्रामीणों को आज भी कई मिल पैदल चलने को विवश होना पड़ता है ? शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अभाव में पलायन ही तो विकल्प बचता है।
भावना पांडे का उद्देश्य, प्रदेश के करीब दस हजार युवाओं को रोजगार देने का है। जिसके लिये वह, तमाम योजनाओं पर काम रही हैं। हरिद्वार में तैयार फ्रोजन प्लांट के लिये, पर्वतीय जिलों के किसानों के उत्पादों को खेत से ही खरीदकर उन्हें बिचौलियों से भी बचाया जायेगा। इसके अलावा, उत्तराखंड में सुपर मार्केट की चैन भी शुरू करने के प्रयास कर रही हैं।
भावना पांडे का दावा है कि यदि उत्तराखंड सरकार भूमि उपलब्ध कराए, तो वो यहां फ़िल्म सिटी बनाने को निवेशक ला सकती हैं। जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ेंगे। पहाड़ में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही प्रतिभाओं की कमी नहीं, कमी है तो बस फ़िल्म नीति की।
लॉक डाउन के दौरान देहरादून में नियमित रूप से जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही, कोरोना वारियर्स को भी मास्क, सेनिटाइजर और ग्लब्स वितरित करती रहीं। इसके अलावा, आवारा मवेशियों और बंदरों को भी नियमित भोजन करवाना नहीं भूलती। समाज के प्रति समपर्ण भाव को देख ही, भावना पांडे को कोरोना वॉरियर्स भी चुना गया।

देवभूमि खबर

Related articles