6-18 वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए घर-घर सर्वे कर गणना के निर्देश

6-18 वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए घर-घर सर्वे कर गणना के निर्देश
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चमोली।शिक्षा विभाग एवं सर्व शिक्षा अभियान के तत्वाधान में बालगणना स्टीयरिंग कमेटी की बैठक जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में क्लेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। जिसमें शिक्षा से वंचित एवं ड्राप आउट 6-18 वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए घर-घर सर्वे कर बालगणना करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा बालगणना बेहद महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने शिक्षा विभाग को घर-घर सर्वे करने के आलावा मलिन बस्तियों एवं सड़कों पर काम करने वाले मजदूरों के 6-18 वर्ष के सभी बच्चों की बालगणना करने एवं उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कहा कि किसी भी दशा में शिक्षा से कोई भी बच्चा वंचित न रहे। तपोवन एवं माणा वैली में सड़क निर्माण कार्यो में लगे मजदूरों के बच्चों को बालगणना में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए और जब तक स्कूल नही खुलते तब तक उनको किताबें व लेखन सामग्री दी जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि बालगणना कार्यो की तहसील स्तर पर एसडीएम के माध्यम से भी रेन्डमली सर्वे कराया जाएगा। कहा कि अगर बालगणना के आंकडे गलत मिले और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित पाया गया तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां के खंड शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदार मानकर सख्त कार्यवाही भी अमल में लाए जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी प्राइवेट एवं सरकारी शिक्षण संस्थाओं में आर्थिक रूप से गरीब परिवार के बच्चों के लिए रिजर्व सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कहा कि प्राइवेट स्कूलों के आसपास अभिभावकों को इस बारे में विशेष अभियान चलाकर जानकारी भी दी जाए।
मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि बच्चों को प्रकाशमय जीवन देने के लिए शिक्षा वेहद अहम है। इसलिए जनपद में रहने वाले सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडा जाना अति आवश्यक है।

बैठक में सर्व शिक्षा अभियान जिला समन्वयक नरेन्द्र सिंह खत्री ने बालगणना कार्यो के संबध में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया कि स्कूल खुलने के बाद प्रत्येक वार्ड, बस्ती में स्थाई या अस्थाई निवास करने वाले, घुमन्तू, भिखारी, अनाथ, मलिन बस्तियों में रहने वाले एवं श्रम कार्य से संबधित परिवारों के 6-14 वर्ष के बच्चों की गणना की जाएगी। इसके अलावा 6-18 वर्ष के दिब्यांग बच्चों को उनकी विशेष आवश्यकता के आधार पर अलग अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। बालगणना का कार्य प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के माध्यम से कराया जाएगा। इस कार्य में बाल विकास, स्वास्थ्य, श्रम विभाग एवं समाज के जागरूक व्यक्तियों, स्वैच्छिक संगठनों से भी सहयोग लिया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी एलएम चमोला, जिला शिक्षा अधिकारी (मा0) आशुतोष भण्डारी, जिला शिक्षा अधिकारी (बे0) नरेश कुमार हल्दियानी सहित खण्ड शिक्षा अधिकारी आदि मौजूद थे। 

देवभूमि खबर

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