संकुचित सोच का दायरा तोड़ने से ही मिलेगी सफलता:विंग कमांडर विक्रांत उनियाल
देहरादून ।दून विश्वविद्यालय में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत विंग कमांडर विक्रांत उनियाल का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों के साथ प्रश्न-उत्तर शैली में सीधा संचार स्थापित किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषम परिस्थितियों में मोटिवेशन को बनाए रखना और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना था।

विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने बताया कि 21 मई को उन्होंने एवरेस्ट को अपने पहले ही प्रयास में फतह किया. यह पूरा अभियान जोखिम भरा था क्योंकि वहां का मौसम बहुत ही परिवर्तनशील रहता है और तापमान में माइनस 20 से 40 डिग्री का अंतर होता रहता है साथ ही कई जगह खड़ी चढ़ाई होती है।इस जोखिम भरी यात्रा में शारीरिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सशक्त रहने की जरूरत होती है।क्योंकि जब हम विषम परिस्थितियां में होते है तो उस समय में हमारे अन्दर कुछ करने की चाहत हमें उन परिस्थितियों से बाहर निकाल देती है। उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले उन्होंने मानसिक रूप से कई बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का अभ्यास किया ताकि मेरे मन को यह यकीन हो जाए कि मैं यह काम कर सकता हूं। उन्होंने बताया कि अपने अभियान से पहले उन्होंने यूट्यूब पर माउंट एवरेस्ट पर होने वाली सभी दिक्कतों के बारे में गहन शोध किया ताकि संभावित समस्या के निराकरण के लिए संभावित समाधान को खोजा जा सके। उन्होंने कहा कि इसीलिए हमें सदैव अपनी संकुचित सोच से बाहर आने के लिए उसे चैलेंज करते रहना चाहिए. जब हम अपनी सोच का दायरा बढ़ाएंगे तो हम अपने जीवन में असंभव लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं।
इसी क्रम में, राज्य आंदोलनकारी और समाजसेवी रविंद्र जुगरान ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि समाज में सुधार लाने के लिए बहुत ज्यादा लोगों की आवश्यकता नहीं होती है वल्कि कुछ चुनिंदा समर्पित, सत्यनिष्ठ और निष्ठावान लोगों की आवश्यकता होती है जो अपने लक्ष्य के प्रति लगन शील होते हैं और वर्तमान सिस्टम को बदलने का प्रयास करते रहते हैं।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विंग कमांडर विक्रांत उनियाल के द्वारा प्रथम प्रयास में एवरेस्ट की चोटी को फतह करना न केवल उत्तराखंड वल्कि समस्त भारत वासियों के लिए गौरव का क्षण है. एवरेस्ट की चोटी पर मास्क, धूप से बचने वाला चश्मा और ऑक्सीजन को हटा कर राष्ट्रगान को पूरे प्रोटोकॉल के साथ उचित स्वर में विक्रांत उनियाल के द्वारा गाया। उनका यह जज्बा देखकर निश्चित ही विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी की विषम परिस्थितियों में किस तरीके से अपने उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।दून विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों के लिए जो सीडीएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, के लिए विंग कमांडर विक्रांत उनियाल का एक विशेष सत्र आयोजित करेगी ताकि विद्यार्थियों को जल, नभ और वायु सेना में जाने के प्रयासों को सफलता में बदलने के लिए दिशा निर्देशित मिल सकें।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के विख्यात कवि अतुल शर्मा भी उपस्थित थे और उन्होंने अपनी लिखित रचना को विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया और इस रचना के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने विंग कमांडर विक्रांत उनियाल से बहुत सारे प्रश्न पूछे जिसका उत्तर उन्होंने बहुत ही धैर्य के साथ दिया। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ राजेश भट्ट के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर सविता कर्नाटक, यशवी, दीपक कुमार, आयुषी, विज्ञानी, महक, स्वस्तिका, श्रेया मेहता, विपाशा और श्रेया भट्ट आदि उपस्थित थे।

