संयुक्त नागरिक संगठन के तत्वावधान मे आयोजित वर्चुअल संवाद मे कई सामाजिक संस्थाओं ने किया प्रतिभाग
देहरादून।संयुक्त नागरिक संगठन के तत्वावधान मे आयोजित वर्चुअल संवाद मे विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर अनेक सामाजिक संस्थाओ के प्रतिनिधियो ने भाग लिया।
इस अवसर वक्ताओं ने कहा कि हिमालय के जोशीमठ क्षेत्र के रेनी गाँव तथा इससे पहले केदारनाथ त्रासदियां हमे सीख देती है कि हम पृथ्वी के इस भाग की रक्षा जल,जंगल और ज़मीन को बचाकर ही कर सकतेहैं। इसमे जल संरक्षण की बेहद अहम भूमिका है। पानी की बरबादी हमारे भूमंडल के बिगड़ते हालात के लिए जिम्मेदार है। वक्ताओं ने कहा कि हमें पर्यावरण कक बचाने के लिए पॉलिथिन उत्पादो का प्रयोग नहीं करने की शपथ लेनी होगी।
विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर संवाद करते हुए वक्ताओ ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने में वाहनो की असीमित वृद्धि को भी मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का प्रमुख कारण है। हमेे आसपास जाने हेतु साइकिल का प्रयोग करना चाहिए। मानव कृत्रिम जीवन जीने का आदि होकर प्रकृति से दूर हो चुका है। वक्ताओं का यह भी कहना था कि जीवन मानव प्रजाति तक सीमित नहीं है इसमे पशु-पक्षियों, जानवर,समुद्री जीव सभी शामिल है। हमे सबको बचाना है।वर्षा के पानी को इकट्ठा करने हेतु हमे ग्राउंड वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक अपनानी होगी तथा वृक्षाारोपण जिसमे फलदार वृक्ष भी शामिल हो,करना होगा। कहा कि हम सबको वैश्विक उत्तरदायित्व, पारस्परिक सहयोग,और एक जुटता की भावना से मातृभूमि को बचाने के लिए प्रयास करने होंगे और कचरे के ठीक प्रबंधन हेतु गीले और सूखे कचरे को अलग अलग करना चाहिए। महिला वर्ग के अनुसार वृक्षो को बचाने मेरा जस्थान के खलजडी आन्दोलन, उत्तराखंड के चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन तथा खेती की उर्वरा शक्ति को बचाने हेतु नव धानया आन्दोलन मे महिलाओ की भूमिका सर्वविदित है।आज भी महिलाएं पृथ्वी के संरक्षण मे अपनी भूमिका का निर्वाह कर रही है। हमे आसपास की जगह को वन्यजीवों के रहने हेतु संरक्षित भी रखना होगा।

