सभी विभाग मोथूगाढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर कार्य करें:जिलाधिकारी

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चमोली।मोथूगाढ नदी के अस्तित्व को बचाने और इसे पुनःसदानीरा बनाने के मुहिम शरू कर दी गई है। इसके लिए 12 रिचार्ज जोन में विभाजित कर नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंगलवार को जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने मोथूगाढ नदी के पुनर्जीवीकरण के लिए गैरसैंण ब्लाक सभागार मे सभी रेखीय विभागों के अधिकारियों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करते हुए इस योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों को एक जनआंदोलन के रूप शुरू करने का आवाहन किया। इस कार्य हेतु उन्होंने स्थानीय लोगो के सहयोग से मोथूगाढ नदी को पुनजीर्वित करने हेतु मिशन के रूप मे कार्य करने पर जोर दिया। क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने आला अधिकारियों के साथ रिचार्ज क्षेत्रों को भ्रमण कर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने कहा नदियां जीवनदायिनी होती है, लेकिन बदलते परिवेश मे अधिकांश नदियों का जल स्तर दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है, जो एक चिंता का बिषय है। उन्होंने कहा कि जिले मे मोथूगाढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जीपीएस सिस्टम के तहत वृहद स्तर पर प्लान तैयार किया गया है जिसको सभी के सहयोग से धरातल पर उतारा जाएगा। उन्होंने सभी रेखीय विभागों के अधिकारियों को गैरसैण ब्लाक मे मोथूगाढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए टैंक, गोल्स, तालाब, चालखाल के साथ साथ वृहद स्तर पर पौधरोपण के लिए तैयार योजना के अनुसार कार्य करने को कहा, ताकि झील व जलाशय बनने से भूमिगत जल भंडार मे बृद्धि हो सके।
डीपीओ को रिचार्ज क्षेत्रों में गढ्ढे खुदाई के लिए माॅडल आंगणन तैयार करने के निर्देश दिए ताकि सभी क्षेत्रों में एक समान आंगणन के आधार पर जल्द से योजना को धरातल पर उतारा जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी रेखीय विभागों को एक सप्ताह के भीतर रिजोविनेशन कार्य शुरू करने तथा 31 दिसंबर तक रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने वन, कृषि, उद्यान व सिचाई विभाग के अधिकारियों को मनरेगा से कन्र्वजेन्स करते हुए मोथूगाढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर कार्य करने को कहा। साथ ही जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगो को प्रोत्साहित करने व उनके सहयोग से कार्य करने को कहा। वन विभाग को क्षेत्र मे गठित स्वयं सहायता समूहों के सार मिलकर चारापत्ती वाले पौधों का रोपण करने को कहा। उन्होंने मनरेगा व कैम्पा योजना के साथ कनवर्जन करते हुए लेबर कंपोनेन्ट की व्यवस्था बनाते हुए पूरे क्षेत्र को माइक्रो प्लान के तहत रिचार्ज करने पर जोर दिया। वन, कृषि, उद्यान, पशुपालन, सिचाई आदि विभागों को भी अनारक्षित क्षेत्रों मे पौधरोपण व चालखाल हेतु कार्य करने को कहा।
जिलाधिकारी ने कहा कि मोथूगाढ नदी के पुनःसदानीरा करने के लिए किए जा रहे कार्यों की जीपीएस से मानिटरिंग भी की जानी है इसलिये जहा पर भी पौधरोपण, गोल्स, चालखाल, तालाब बनाए जाएंगे उनकी फोटोग्राफ भी जीपीएस पर अपलोड करना सुनिश्चित करें। मोथूगाढ नदी रिजोविनेशन परियोजना के अन्तर्गत चैराखाल, दूधातोली, कुडियाबगड तथा मूसा का कोठा आरक्षित रिजर्व जोन है। जबकि देवधार, देवालीखाल, घडियालखाल, हिमवालघाट, परवारी, नंदादेवी एवं सिलकोट अनारक्षित रिजर्व जोन है। इन सभी क्षेत्रो को रिचार्ज करने के लिए वृहद स्तर पर कार्ययोजना बनाई गई है। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक सुरेन्द्र सिह नेगी, ब्लाक प्रमुख गैरसैंण शशि देवी, सीडीओ हंसादत्त पांडे, एसडीएम वैभव गुप्ता, डीडीओ एसके राय सहित सभी रेखीय विभागों के अधिकारी व क्षेत्रीय ग्राम प्रधान आदि उपस्थित थे।

देवभूमि खबर

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