सम्पूर्ण प्रवेज प्रक्रिया ’संवाद‘ हुई ऑनलाइन, आज मधयरात्रि से पंजीकरण प्रारंभ

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हरिद्वार।देवभूमि खबर। स्वामी रामदेव महाराज व आचार्य बालकृष्ण महाराज के शुभाशीश से पल्लवित एवं पुष्पित, प्राचीन एवं आधाुनिक शिक्षा के ‘अभिनव प्रयाग’ आचार्यकुलम् में आज ‘डिजिटल क्रांति’ का पूर्ण भव्यता एवं दिव्यता के साथ स्वामी रामदेव महाराज के करकमलों से ’श्री गणेश‘ हुआ। इसके साथ ही संस्थान की सम्पूर्ण प्रवेश प्रक्रिया ’संवाद‘ ऑनलाइन हो गई। मध्यरात्रि ( 10-12-2019) से ही देश-विदेश से कोई भी प्रवेशार्थी इस हेतु पंजीकरण कर सकता है। प्रथम प्रवेशार्थी के रूप में इस अवसर पर अनुष्का पाल का पंजीकरण भी किया गया।

इससे पूर्व संस्थान के मुख्यद्वार पर डॉ0 ऋतंभरा शास्त्री ‘बहनजी’, प्राचार्य कैलाशचन्द्र पाण्डेय सहित आचार्यों व विद्यार्थियों ने स्वामी रामदेव महाराज , आचार्य प्रद्युम्न सहित मुख्य अतिथि व आगंतुकों का वैदिक रीति से स्वागत कर पुष्पगुुच्छ भेंट किया। तत्पश्चात एनसीसी बटालियन व बैण्ड द्वारा सभी की अगवानी कर पुष्पवर्षा के मध्य मंच तक लाया गया। तदुपरांत दीप प्रज्वलन, स्वागत गीत व डिजिटल इंडिया गीत की विद्यार्थियों द्वारा सुमधुर प्रस्तुतियाँ हुई।
संस्थान की प्रधान समन्वयिका सुश्री वंदना मेहता ने बताया कि आचार्यकुलम् की वेबसाइट ूूू.ंबींतलंानसंउ.वतह पर दिए गए लिंक के माध्यम से कोई भी प्रवेशार्थी अपना पंजीकरण कर सकता है। पंजीकरण करते समय प्रवेशार्थी अपना आधार कार्ड, फोटो व पंजीकरण शुल्क 1200 रुपए के ऑनलाइन भुगतान हेतु एटीएम कार्ड साथ रखें। प्रवेश परीक्षा हेतु देशभर में 35 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, आप अपने निकटतम केंद्र का चयन कर आगामी 5 जनवरी 2020 को ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा दे सकते हैं।
अपने उद्बोधन में परमपूज्य स्वामीजी ने कहा कि आचार्यकुलम् विशिष्ट शिक्षण संस्थान है, जहाँ भौतिकता व विज्ञान के आलोक को आध्यात्मिकता से अमृतोपम बनाया जाता है व तकनीकी का विश्वकल्याण हेतु पवित्र साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने कहा कि विनम्रता सर्वोच्च योग्यता है। शिष्य अपनी विनम्र भावना से स्वयं को आचार्य के सर्वश्रेष्ठ ज्ञान का सत्पात्र सिद्ध कर सकता है और यह योग्यता इस संस्थान में प्रवेशमात्र से ही सुलभ है। सभा को सम्बोधिात करते हुए महासचिव ने कहा मात्र सृजनात्मक रहकर ही हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। डॉ0 ऋतंभरा शास्त्री ‘बहनजी ने विद्यार्थियों से अपने आचार्यों का नित्य सम्मान करने का संकल्प करवाया। कार्यक्रम में आचार्य रजनीजजी, साध्वी देववरेण्याजी व देवकृतिजी सहित सभी आचार्य व कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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