‘हर घर पोषण का व्यवहार‘ कार्यक्रम
पौड़ी।महिला शक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड के तत्वाधान में आज ‘हर घर पोषण का व्यवहार‘ कार्यक्रम के तहत आज जनपद में महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, स्वच्छता एवं पेयजल विभाग द्वारा समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में क्रियात्मक जागरूकता कार्यक्रम के तहत बच्चों के अभिभावकों को पोषण आहार एवं स्तनपान की जानकारी दी गई।
निर्धारित जन-जागरूकता कार्यक्रम के तहत संबंधित आंगनबाड़ी केन्द्रों में संबंधित अधिकारी /आंगनबाड़ी केन्द्रों के कार्मिकों द्वारा बच्चों के अभिभावकों को शिशु के प्रथम एक हजार दिन (गर्भावस्था के 270 दिन$जन्म के बाद 180 दिन$छः माह से 02 वर्ष तक कुल 550 दिन) के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं प्रथम एक हजार दिनों में ध्यान देने वाली मुख्य बातें यथा गर्भावस्था के दौरान टी.टी. के टीके, आयरन की गोलियां, संतुलित आहार, संस्थागत प्रसव के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना के लाभ लेने के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जन्म के तुरन्त बाद माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध छः माह तक केवल स्तनपान, छः माह उपरान्त स्तनपान के साथ ही शिशु को ऊपरी आहार/अर्द्धठोस आहार जैसे खिचड़ी, दलिया, चावल, सूजी की खीर, मसला हुआ केला, उबला आलू आदि देना शुरू करना चाहिए। धीरे-धीरे आहार की मात्रा व आहार में विविधता लाई जाये और साथ ही दो वर्ष तक के बच्चे को स्तनपन भी जारी रखा जाए। उन्होंने बताया कि यह समय बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों को इसके महत्व के बारे में अवश्य बताया जाये।

