पुलिस विभाग के अवर अभियंता सुधाकर त्रिपाठी को रिश्वत के आरोप में न्यायालय ने सुनाई सजा
देहरादून। शिकायतकर्ता द्वारा सतर्कता सेक्टर देहरादून में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि “ठेकेदार” श्रेणी में होने के नाते वह फायर स्टेशन सिडकुल हरिद्वार के निर्माण एवं सुधार कार्य के भुगतान के अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्राप्ति के लिए अवर अभियंता सुधाकर त्रिपाठी से संपर्क में था। त्रिपाठी ने इस प्रमाण पत्र को देने के बदले में ₹25,000 की रिश्वत की मांग की।
शिकायतकर्ता की इस शिकायत के आधार पर, सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने योजना बनाई और त्रिपाठी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 17/6/2010 को, जब त्रिपाठी ने ₹25,000 की रिश्वत ली, उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया और नियमानुसार न्यायालय में पेश किया गया।
न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के दौरान, अभियोजन अधिकारी श्री धर्मेंद्र और पैरोकार कान्ति गोपाल ने अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और बहस के बाद, 31/8/2024 को माननीय विशेष न्यायालय के न्यायाधीश श्री मनीष मिश्र ने सुधाकर त्रिपाठी को दोषी ठहराया। उन्हें धारा 7 के तहत पाँच वर्ष के कठोर कारावास और ₹25,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त, धारा 13(1) डी के तहत भी पाँच वर्ष का सश्रम कारावास और ₹2500 जुर्माने की सजा दी गई।
सतर्कता विभाग ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत की मांग करता है तो वे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1064 या व्हाट्सएप नंबर 9456592300 पर शिकायत दर्ज कराएं।

