आईसीयू में गंभीर देखभाल प्रबंधन – गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में व्यापक सीएमई कार्यक्रम

आईसीयू में गंभीर देखभाल प्रबंधन – गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में व्यापक सीएमई कार्यक्रम
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देहरादून।गंभीर देखभाल प्रबंधन (Critical Care Management) पर एक महत्वपूर्ण सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज (GDMC), देहरादून के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM), देहरादून चैप्टर, देहरादून सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट (DSA) और स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO), उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा पेशेवरों को आईसीयू में नवीनतम रुझानों और तकनीकों से अवगत कराना था। इस कार्यक्रम में डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और क्रिटिकल केयर डोमेन में कार्यरत अन्य विशेषज्ञों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और SOTTO उत्तराखंड के प्रभारी डॉ. अतुल कुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया। उनके नेतृत्व में, उत्तराखंड में क्रिटिकल केयर और अंग प्रत्यारोपण संबंधी जागरूकता को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से वरिष्ठ विशेषज्ञों को जोड़ने का कार्य किया गया। इस कार्यक्रम में जीडीएमसी देहरादून की प्राचार्या डॉ. गीता जैन, हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रंगील सिंह रैना, जीडीएमसी के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव चोपड़ा, देहरादून सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की अध्यक्ष रोबिना माकर, ISCCM की सचिव डॉ. सोनिका अग्रवाल और कई अन्य प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। डॉ. ऋचा लोहानी ने अचेतन रोगियों के प्रारंभिक प्रबंधन और क्रिटिकल केयर पर अपने विचार साझा किए। डॉ. वीना बोसवाल ने रक्त गैस विश्लेषण (ABG Interpretation) पर विस्तार से जानकारी दी, जिससे श्वसन और चयापचय संबंधी गड़बड़ियों की पहचान की जा सके। डॉ. राहुल चौहान ने शॉक और उसके विभिन्न प्रकारों – हाइपोवोलेमिक, कार्डियोजेनिक, ऑब्सट्रक्टिव और डिस्ट्रिब्यूटिव – पर व्याख्यान दिया और इसके उपचार के लिए फ्लूइड रिससिटेशन, वासोप्रेसर थेरेपी और इंट्रा-ऑर्टिक बैलून पंप (IABP) जैसी तकनीकों पर चर्चा की।

डॉ. सोनिका अग्रवाल ने आईसीयू में एंटीबायोटिक उपयोग और अस्पताल में होने वाले संक्रमणों से बचाव की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. अतुल कुमार सिंह ने ऑक्सीजन थेरेपी और आईसीयू में उसके उपयोग की महत्ता पर चर्चा की। डॉ. शोभा वी. ने आर्टेरियल वेवफॉर्म्स के उपयोग से हृदय प्रणाली की निगरानी पर व्याख्यान दिया। डॉ. दीपिका तिवारी ने आईसीयू में दर्द प्रबंधन और सेडेशन पर चर्चा की, जबकि डॉ. प्रियंका उनियाल ने बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं पर जानकारी दी।

डॉ. अमर उपाध्याय ने एडवांस कार्डिएक लाइफ सपोर्ट (ACLS) पर व्याख्यान दिया, जिसमें कार्डियक अरेस्ट में दवा और डिफिब्रिलेटर के उपयोग की चर्चा की गई। डॉ. इकरा ने मस्तिष्क मृत्यु (Brain Stem Death) की नैदानिक प्रक्रियाओं और उनके कानूनी पहलुओं को समझाया, जबकि डॉ. इशिता बहुखंडी ने अंगदान में मृतक रोगियों की देखभाल और इसके प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।

कार्यक्रम में मेडिकल छात्रों, इंटर्न्स और नर्सिंग स्टाफ के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए। इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), वेंटिलेटर प्रबंधन और इमरजेंसी एयरवे मैनेजमेंट पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। प्रशिक्षकों ने वेंटिलेटर सेटिंग्स और एडवांस एयरवे डिवाइसेज़ पर विस्तृत जानकारी दी।

गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में आयोजित यह सीएमई कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा। इस कार्यक्रम ने क्रिटिकल केयर प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सा विशेषज्ञों को एक व्यापक मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और नवीनतम शोधों पर विचार-विमर्श किया। यह आयोजन चिकित्सा शिक्षा के विकास और आईसीयू देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

देवभूमि खबर

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