भू कानून: कितना सख्त, कितना नरम? : गरिमा मेहरा दसौनी
देहरादून।उत्तराखंड कैबिनेट ने आज बहुप्रतीक्षित भू कानून को हरी झंडी दे दी, जिस पर कांग्रेस नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की भूमि के अंधाधुंध दोहन के कारण उत्तराखंड आज “लैंड बैंक” के मामले में पूरी तरह से दिवालिया हो चुका है।
दसौनी ने कहा कि पिछले 24 वर्षों में उत्तराखंड की भूमि का सबसे अधिक दुरुपयोग भाजपा सरकारों के कार्यकाल में हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने भू कानून में बदलाव कर राज्य की भूमि को “सेल पर” लगा दिया, जिससे जमीन की खुली लूट शुरू हो गई। उन्होंने पूछा कि अगर धामी सरकार ने अब उन प्रावधानों को निरस्त कर दिया है, तो क्या वह 2017-2021 के दौरान बेची गई भूमि को वापस ला पाएगी?
उन्होंने कहा कि धामी सरकार में एक और खतरनाक बदलाव किया गया था—लैंड यूज नियमों में ढील, जिससे खरीदारों को भूमि के उपयोग में पूरी छूट मिल गई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या वह इस प्रावधान को भी खत्म करेगी?
दसौनी ने कहा कि सरकार नए जिलों की घोषणा तो करती है, लेकिन जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल है। उन्होंने पूछा कि सत्ता पक्ष के मंत्री और विधायक प्रतिबंधित भूमि पर रिसॉर्ट और होटल बना रहे हैं, तो क्या उन पर भी कार्रवाई होगी?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का भू कानून हिमाचल से भी अधिक सख्त होना चाहिए, क्योंकि हिमाचल समय रहते चेत गया था और अपनी भूमि बचा ली थी, जबकि उत्तराखंड की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। अब यह देखना होगा कि धामी सरकार का नया भू कानून वास्तव में सख्त होगा या सिर्फ दिखावे के लिए लाया गया है।

