एसीसीएफ, वन संरक्षण, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन ने मसूरी वन प्रभाग में मास्टर कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर की वनाग्नि नियंत्रण के प्रयासों की समीक्षा
देहरादून। अपर प्रमुख वन संरक्षक, वन संरक्षण, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन उत्तराखण्ड द्वारा मसूरी वन प्रभाग के अन्तर्गत मास्टर कंट्रोल रूम, राजपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मालसी क्रू स्टेशन में मसूरी वन प्रभाग द्वारा वनाग्नि नियंत्रण हेतु की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली गई। उन्होंने मालसी क्रू स्टेशन में वनाग्नि से संबंधित संधारित विभिन्न पंजिकाओं का निरीक्षण भी किया तथा ऑनलाइन उत्तराखण्ड फॉरेस्ट फायर ऐप एवं एफ.एस.आई. से प्राप्त अलर्ट सिस्टम की जानकारी ली।
निरीक्षण के अवसर पर श्री उदय नंद गौड़, उप प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून, मसूरी वन प्रभाग द्वारा अवगत कराया गया कि मसूरी वन प्रभाग में 16 बेस स्टेशन तथा 43 क्रू स्टेशन स्थापित हैं, जिनमें कुल 198 फायर वॉचर कार्यरत हैं। अपर प्रमुख वन संरक्षक ने वनाग्नि नियंत्रण व्यवस्था की सराहना करते हुए निर्देशित किया कि वनाग्नि काल 2025 के दौरान गांव एवं ब्लॉक स्तर पर समितियों के साथ जागरूकता बैठकें आयोजित की जाएं तथा वनाग्नि संभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखी जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक दिन अग्नि खतरा रेटिंग सूचकांक की गणना तीन बार की जाए और सभी 43 क्रू स्टेशनों को यह सूचकांक नियमित रूप से सूचित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि समुचित संख्या में फायर वॉचरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा फायर लाइन की सफाई के दौरान एकत्रित पत्तों को जलाने के बजाय प्राकृतिक गड्ढों में डम्प कर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाए। स्थानीय निवासियों से आड़ा न जलाने की अपील भी की गई।
इसके अतिरिक्त, अपर प्रमुख वन संरक्षक द्वारा रिंगालगाढ़ स्थित पिरूल पैलेट्स निर्माण इकाई का भी अवलोकन किया गया और वहां के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ अन्य इकाइयाँ स्थापित करने हेतु स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर उप प्रभागीय वनाधिकारी श्री उदय नंद गौड़, वन क्षेत्राधिकारी रायपुर रेंज श्री राकेश नेगी, उप वन क्षेत्राधिकारी श्री विरेन्द्र दत्त जोशी, वन दरोगा राजपुर श्री गोविन्द सिंह नगरकोटी व श्री लोकेश शाह, वन बीट अधिकारी कु. पिंकी कैन्तुरा, वन आरक्षी मास्टर कंट्रोल रूम श्रीमती नैना पाण्डेय सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

