उत्तराखंड में खेती की क्रांति: बारहनाजा मिलेट्स, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और सेब के लिए सरकार की बड़ी पहल – किसानों को मिलेगा स्वरोजगार, रुकेगा पलायन
देहरादून।उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत और संस्थागत स्तर पर बड़े पैमाने पर योजनाएं लागू कर रही है। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने सचिवालय मीडिया सेंटर में प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य की परंपरागत बारहनाजा पद्धति को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित करने तथा आधुनिक फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई अभिनव योजनाएं शुरू की गई हैं।
मिलेट्स के लिए उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी 2025-26 के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना जैसी फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन को दो चरणों में 11 पर्वतीय जनपदों में लागू किया जाएगा। योजना में 134.89 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।
मंत्री जोशी ने बताया कि चयनित मिलेट फसलों के बीज व जैव उर्वरक 80% अनुदान पर किसानों को दिए जाएंगे, साथ ही बुवाई पर भी नकद प्रोत्साहन मिलेगा। प्रत्येक विकासखंड में मिलेट्स प्रसंस्करण इकाई स्थापित होगी और श्रेष्ठ कार्य करने वाले कृषक समूहों को सम्मानित किया जाएगा।
सरकार की उत्तराखंड कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती योजना के अंतर्गत आधुनिक फलों की खेती को नई ऊंचाई दी जा रही है। कीवी की खेती पर 70% अनुदान और ड्रैगन फ्रूट पर 80% अनुदान दिया जाएगा। कीवी नीति के अंतर्गत 17500 किसानों को लाभ देने का लक्ष्य है, जबकि ड्रैगन फ्रूट योजना में 450 किसान लाभान्वित होंगे।
सेब की तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना में 7 वर्षों के दौरान 22 सीए स्टोरेज और 180 सार्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयां स्थापित की जाएंगी। योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों से लेकर एफपीओ को भारी सब्सिडी दी जाएगी।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों को मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (CMFME) के अंतर्गत अतिरिक्त 25% या अधिकतम 5 लाख रुपए तक का टॉपअप अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इससे 780 इकाइयों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा।
मंत्री गणेश जोशी ने विश्वास जताया कि इन योजनाओं के माध्यम से राज्य में कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा। सरकार का उद्देश्य है कि पारंपरिक खेती और आधुनिक उद्यानिकी का समन्वय कर उत्तराखंड को कृषि-स्वावलंबी राज्य बनाया जाए।

