श्री हेमकुंट साहिब के कपाट खोले गए: बोले सो निहाल… के जयघोष के बीच उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
चमोली। श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा के कपाट “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के पवित्र जयघोष के साथ आज सुबह विधिवत रूप से खोल दिए गए। कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर गढ़वाल स्काउट्स के बैंड और पंजाब से आए दो बैंडों ने शोभायात्रा के आगे चलकर अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। मुख्य ग्रंथी मिलाप सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अपने सिर पर धारण कर शीतकालीन निवास से गुरुद्वारे तक की यात्रा पूरी की। सेना के जवानों ने शोभायात्रा का संचालन करते हुए पूरे मार्ग में अनुशासन बनाए रखा।
सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ धार्मिक समागम की शुरुआत हुई, जिसके बाद भाई मक्खन सिंह जी ने कीर्तन की मधुर प्रस्तुति दी। दोपहर 12:30 बजे मानवता के कल्याण के लिए अरदास की गई।
इस अवसर पर श्री हेमकुंट साहिब में पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं का संगम देखने को मिला, जहां श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम नजर आया।
आईटीबीपी, एसडीआरएफ और पुलिस के जवानों ने पूरे ट्रैक मार्ग पर तैनात रहकर तीर्थयात्रियों को ग्लेशियर और कठिन रास्तों को पार कराने में सहायता की। ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने संगत का स्वागत करते हुए सेना के जवानों का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बर्फ हटाकर यात्रियों के लिए दर्शन सुगम बनाए। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के सहयोग से मार्च में भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुए गोविंदघाट के पुराने पुल के स्थान पर अल्प समय में वैली ब्रिज का निर्माण संभव हो सका।
कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर ब्रिगेड कमांडर सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्हें ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया। गोविंदघाट के महाप्रबंधक श्री सेवा सिंह और श्री हेमकुंट साहिब के प्रबंधक श्री गुरनाम सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
विश्वभर से आए श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक आयोजन में भाग लिया। चारों ओर बर्फ की 5 फीट मोटी चादर के बीच भक्तों का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बनती थी। शानदार सजावट ने इस आयोजन को और भी दिव्य बना दिया, जिससे यह आयोजन सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
