प्रत्येक लाभार्थी तक आयुष्मान का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता: अरविंद सिंह ह्यांकी

देहरादून । राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) और आयुष्मान/गोल्डन कार्ड सूचीबद्ध अस्पतालों की संयुक्त समीक्षा व समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ऑनलाइन पोर्टल, दावों के निस्तारण, अमान्य दावों और रिव्यू जैसी विभिन्न समस्याओं पर विचार-विमर्श हुआ। योजना के बेहतर संचालन के लिए अस्पताल प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव भी साझा किए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के चेयरमैन श्री अरविंद सिंह ह्यांकी ने कहा कि आयुष्मान योजना का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुँचना चाहिए, यही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पताल प्रतिनिधियों को विस्तार से अपनी समस्याएं रखने का अवसर दिया और आश्वस्त किया कि सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
चेयरमैन ने बताया कि एनएचए के ट्रांजिक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) में तकनीकी कठिनाइयों के कारण दावों के निस्तारण में विलंब हुआ है, लेकिन अब इन्हें शीघ्रता से हल किया जा रहा है। आयुष्मान दावों का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। पुराने दावों के लिए ऑफलाइन रिव्यू की सुविधा भी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य का अपना TMS सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे तकनीकी दिक्कतों में कमी आएगी। प्रक्रियाओं को सरल और फेसलेस बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी हैं ताकि अस्पतालों को अनावश्यक दौड़-धूप न करनी पड़े।
चेयरमैन ने अस्पतालों से अपेक्षा जताई कि वे मरीजों के उपचार और सुविधा पर विशेष ध्यान दें। साथ ही एनएचए और एसएचए द्वारा निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुसार बिल प्रस्तुत करें ताकि भुगतान में कोई बाधा न आए। अस्पष्ट मामलों में अस्पताल SHA के संबंधित अनुभाग या उच्च अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
गोल्डन कार्ड निर्माण में आ रही समस्याओं को लेकर उन्होंने बताया कि बजट आवंटन की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसमें सुधार की उम्मीद है।
प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्रीमती रीना जोशी ने कहा कि आयुष्मान योजना की सफलता के लिए SHA और सेवा प्रदाता संस्थानों के बीच नियमित समन्वय जरूरी है। उन्होंने अस्पतालों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के नि:शुल्क इलाज हेतु प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए।
बैठक में हिमालयन हॉस्पिटल, महंत इंद्रेश, कैलाश ओमेगा, ग्राफिक एरा, पैनेसिया हॉस्पिटल, हंस फाउंडेशन सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें से अधिकांश का समाधान बैठक में ही कर दिया गया। अस्पताल प्रतिनिधियों ने ऐसी समन्वय बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित करने की मांग की, जिसे चेयरमैन ने स्वीकार कर लिया।

