देहरादून को असुरक्षित शहरों में दिखाने वाली रिपोर्ट भ्रामक: एसएसपी ने रखा पक्ष
देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने प्रेस वार्ता कर स्पष्ट किया कि हाल ही में निजी सर्वे कम्पनी “पी वैल्यू एनालिटिक्स” द्वारा प्रकाशित NARI-2025 रिपोर्ट में देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में दिखाया जाना पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे है। राज्य एवं राष्ट्रीय महिला आयोग दोनों ने ही स्पष्ट किया है कि यह सर्वे किसी सरकारी संस्था द्वारा नहीं बल्कि पूरी तरह निजी कम्पनी का स्वतंत्र कार्य है, जो अपराध के आंकड़ों पर नहीं बल्कि धारणाओं पर आधारित है।
एसएसपी ने बताया कि यह सर्वे केवल 400 महिलाओं से टेलीफोनिक वार्ता कर तैयार किया गया, जबकि देहरादून में लगभग 9 लाख महिलाएं रहती हैं। इतने छोटे सैम्पल साइज से पूरे शहर पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। वहीं, रिपोर्ट में महिला सुरक्षा से जुड़ी कई बातें वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खातीं। उदाहरण स्वरूप, पुलिस पेट्रोलिंग में देहरादून का स्कोर 33% है, जो सर्वाधिक सुरक्षित माने गए शहर कोहिमा (11%) से कहीं अधिक है। इसी प्रकार सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न की दर देहरादून में राष्ट्रीय औसत से कम है।
आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह में डायल 112 पर कुल 12,354 शिकायतें आईं, जिनमें से मात्र 2,287 (18%) महिलाओं से संबंधित थीं और इनमें से भी 1% से कम शिकायतें छेड़छाड़ या लैंगिक हमलों से जुड़ी थीं। इन पर पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 13.33 मिनट रहा। देहरादून पुलिस महिला सुरक्षा के लिए गौरा शक्ति ऐप, SOS बटन, महिला हेल्प डेस्क, पिंक बूथ, वन स्टॉप सेंटर, महिला चीता पेट्रोलिंग और सीसीटीवी नेटवर्क जैसे अनेक प्रभावी कदम उठा चुकी है। वर्तमान में शहर में 14,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे कार्यरत हैं।
एसएसपी ने कहा कि देहरादून देश के सुरक्षित शहरों में गिना जाता है, जहां लगभग 70 हजार छात्र-छात्राएं, जिनमें विदेशी छात्र भी शामिल हैं, सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं। लगातार बढ़ती छात्र व पर्यटक संख्या इस बात का प्रमाण है कि शहर आम नागरिकों और बाहरी आगंतुकों के लिए सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षणों का सम्मान किया जाता है, लेकिन नीति निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि उनकी पद्धति पारदर्शी, वैज्ञानिक और तथ्यों पर आधारित हो। मात्र धारणाओं पर आधारित रिपोर्ट से शहर की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

