इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम 2.0 के क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड देश में प्रथम
देहरादून।भारत की न्यायिक और कानून प्रवर्तन प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में उत्तराखण्ड ने Inter-Operable Criminal Justice System (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय क्रियान्वयन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
National Crime Records Bureau (एनसीआरबी) के नवीनतम CCTNS/ICJS प्रोग्रेस डैशबोर्ड के अनुसार उत्तराखण्ड ने 93.46 के उत्कृष्ट स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखण्ड के बाद हरियाणा 93.41 के स्कोर के साथ दूसरे, असम 93.16 के साथ तीसरे, सिक्किम 91.82 के साथ चौथे तथा मध्य प्रदेश 90.55 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर है।
उत्तराखण्ड की इस सफलता का प्रमुख आधार ICJS 2.0 की “वन डेटा, वन एंट्री” प्रणाली है। इसके अंतर्गत पुलिस के Crime and Criminal Tracking Network and Systems (CCTNS), ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित किया गया है। इससे एक बार दर्ज किया गया डेटा सभी संबंधित विभागों तक तुरंत पहुंच जाता है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होने के साथ ही मुकदमों के निस्तारण में तेजी आई है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रहण भी अनिवार्य किया गया है। ICJS 2.0 के तहत प्रदेश के 23 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही ‘न्याय श्रुति’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से वर्चुअल अदालती सुनवाई तथा फॉरेंसिक मोबाइल वैन की उपलब्धता को भी प्राथमिकता दी गई है।
उत्तराखण्ड पुलिस के प्रवक्ता एवं पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) Sunil Kumar Meena ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य ने तकनीकी ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ रीयल-टाइम डेटा एंट्री में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उच्च स्तरीय बैठकों में उत्तराखण्ड की “वन डेटा, वन एंट्री” प्रणाली की विशेष सराहना की है।
समन्वय, तकनीक और प्रतिबद्धता के साथ उत्तराखण्ड आज देश के लिए “स्मार्ट पुलिसिंग” का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।

