जंतर-मंतर पर ‘अंकिता भंडारी न्याय यात्रा’, गरिमा मेहरा दसौनी ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

जंतर-मंतर पर ‘अंकिता भंडारी न्याय यात्रा’, गरिमा मेहरा दसौनी ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
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नई दिल्ली । जंतर मंतर पर आज अंकिता भंडारी न्याय यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा अंकिता भंडारी न्याय संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित की गई, जिसमें उत्तराखंड और दिल्ली के प्रवासी लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।प्रदर्शनकारियों ने पुष्कर सिंह धामी सरकार पर मामले में उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाया है।

महिला मंच उत्तराखंड की कमला पंत के नेतृत्व आयोजित इस विरोध में शामिल सभी उत्तराखंड के लोगों ने एक स्वर में कहा कि अब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिल पाया है,यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरे मामले की जांच ऐसे आधार पर की जा रही है, जो पीड़ित परिवार की शिकायत से मेल नहीं खाता। इस अवसर पर देहरादून से जंतर मंतर नई दिल्ली पहुंची उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में एक अनिल जोशी की प्राथमिकी को आधार बनाया गया है, जबकि अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिए गए शिकायत पत्र को नजरअंदाज किया गया है। यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर पीड़ित परिवार की आवाज को क्यों दबाया जा रहा है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग स्वाभिमानी होते हैं और अंकिता भंडारी इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी अस्मिता से समझौता करने के बजाय अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने कहा कि यदि हम उन्हें न्याय नहीं दिला पाए, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी। उन्होंने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड में मुख्य आरोपी और सह-आरोपी नामजद हैं, लेकिन जिस तथाकथित “वीआईपी” के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया और ₹10,000 की पेशकश की गई, उसे अब तक बचाने के प्रयास दिखाई देते हैं।

उन्होंने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने और सबूत मिटाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें वनंतारा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाया जाना, 17 दिनों के भीतर दो बार संदिग्ध आगजनी होना और घटनास्थल से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों का नष्ट होना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह संदेह और गहरा होता है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट मांग रखी कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो, पीड़ित परिवार की शिकायत को ही आधार बनाया जाए, संबंधित “वीआईपी” का नाम सार्वजनिक किया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी केवल एक नाम नहीं, बल्कि न्याय की पुकार हैं और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मामले में सबूतों को मिटाने और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों के नष्ट होने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने मांग रखी कि जांच पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर हो, संबंधित “वीआईपी” का नाम सार्वजनिक किया जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।

इस अवसर पर कमला पंत, निर्मला बिष्ट, इंद्रेश मैखुरी, चारु तिवारी, उमाकांत लखेरा, पी.सी. थपलियाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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