“आत्मबोध से ही राष्ट्रनिर्माण का मार्ग प्रशस्त” — गिरीश रंजन तिवारी

“आत्मबोध से ही राष्ट्रनिर्माण का मार्ग प्रशस्त” — गिरीश रंजन तिवारी
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रिपोर्ट।ललित जोशी

नैनीताल। सरोवर नगरी में सीआरएसटी इंटर कॉलेज के सभागार में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, नैनीताल द्वारा ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषय पर एक भव्य सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमूह ने हारमोनियम एवं तबले की संगत में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का भावपूर्ण गायन किया, जिसे सभी ने सराहा।

मुख्य अतिथि राजेश ने अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी में ‘वंदे मातरम्’ का योगदान अद्वितीय रहा है और आज भी यह गीत देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. रेखा त्रिवेदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र को समर्पित है और युवाओं को इससे प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पलता जोशी ने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संदेश देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का जोश हमारी शक्ति और एकता को दर्शाता है। वहीं सौरभ पांडे ने कहा कि ‘जननी जन्मभूमि’ के प्रति सम्मान ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान का मूल भाव है।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं को समझता है, तभी वह राष्ट्र के लिए सही दिशा में कार्य कर सकता है। प्रो. ललित तिवारी ने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि देश केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि हमारी पहचान है।

डॉ. माधव प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि गुलामी के दौर में देश के लिए बलिदान देने वालों ने ‘वंदे मातरम्’ को प्रेरणा स्रोत बनाया। डॉ. जगदीश पंत ने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि है और 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हम ‘वंदे मातरम्’ की भावना को जीवन में उतारेंगे। आशा खाती ने इसे राष्ट्र का गौरव और भारतीयता की पहचान बताया।

कार्यक्रम में बताया गया कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की, जिसे 1882 में ‘आनंद मठ’ में स्थान मिला और 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया। वर्ष 1950 में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का संचालन बसंती रौतेला ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सीआरएसटी एवं बालिका विद्यामंदिर के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रधानाचार्य मनोज पांडे सहित व्यास, शबनम, विनीता पाठक, विमलेश गोस्वामी, नीलम जोशी, बिसना साह, भावना कांडपाल, मुन्नी तिवारी, अंजू बिष्ट, रेनू बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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