दून विश्वविद्यालय में उत्तराखंड की लोक कलाओं और रामलीलाओं में महिलाओं की भूमिका पर संगोष्ठी एवं फोटो प्रदर्शनी आयोजित
देहरादून। अदिति कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और रंगमंच एवं लोक प्रदर्शन कला विभाग, दून विश्वविद्यालय, देहरादून (उत्तराखंड) के संयुक्त सहयोग से और आईसीएसएसआर द्वारा वित्तपोषित अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड की लोक कला एवं रामलीलाओं में महिलाओं की सहभागिता विषय पर एक विशेष संगोष्ठी एवं फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जा किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोक परंपराओं, रामलीला एवं कृष्णलीला जैसी सांस्कृतिक विधाओं में महिलाओं की भूमिका, योगदान और सामाजिक प्रभाव पर गंभीर विमर्श स्थापित करना रहा।
कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल एवं डीन छात्र कल्याण प्रो. एच.सी. पुरोहित विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ताओं के रूप में दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. नीना पांडे, श्रीमती सरिता जुयाल तथा श्रीमती आशा बहुगुणा ने अपने विचार साझा किए।
श्रीमती सरिता जुयाल एवं श्रीमती आशा बहुगुणा ने लोक परंपराओं तथा रामलीला-कृष्णलीला से जुड़े सांस्कृतिक अनुभवों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने संबोधन में कहा कि लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता लोक संस्कृति को नई ऊर्जा, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना प्रदान करती है।
डीन प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा कि लोक कलाएं समाज की सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं और इनमें महिलाओं की भूमिका पर गंभीर विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों को सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
प्रो. नीना पांडे ने कहा कि लोक प्रदर्शन कलाओं में महिलाओं की सहभागिता केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण का भी प्रतीक है। उन्होंने युवा पीढ़ी को लोक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम समन्वयक एवं अनुसंधान कार्यक्रम निदेशक प्रो. पुनीता गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारतीय लोक संस्कृति और महिला सहभागिता के अध्ययन को नई दिशा प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम के संचालन में डॉ. अजीत पंवार तथा कैलाश कांडवाल ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इस अवसर पर प्रो. हर्ष डोभाल, डॉ. चन्द्रशेखर बधानी, आर्चो ज़ुलिखातुन निसा, डॉ. अदिति बिष्ट, डॉ. गजला खान, राजेश भारद्वाज, सरिता भट्ट, सुनील सिंह, अंजेश कुमार, संजय वशिष्ट सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

