ऐपन कला को बनाया रोजगार का माध्यम, पिथौरागढ़ की मानसी कापड़ी बनीं युवा उद्यमिता की मिसाल

देहरादून/पिथौरागढ़। दृढ़ संकल्प, नवाचार और सही मार्गदर्शन मिलने पर युवा अपनी प्रतिभा को नई पहचान दे सकते हैं। पिथौरागढ़ के लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बीबीए छात्रा मानसी कापड़ी ने इसे साबित करते हुए अपनी पारंपरिक ऐपन कला को एक सफल उद्यम का रूप दिया है। आज उनका उद्यम न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्वरोजगार का सशक्त उदाहरण भी बन चुका है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इसी सोच के तहत देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित कर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिससे पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल रही है।
मानसी की उद्यमिता यात्रा वर्ष 2024 में शुरू हुई, जब उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड सरकार तथा भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) के द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लिया। वर्ष 2023 से राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों और 5 विश्वविद्यालयों में संचालित यह योजना युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही है।
बचपन से ही उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपन कला में रुचि रखने वाली मानसी सुंदर ऐपण डिज़ाइन तैयार करती थीं। पहले यह उनका शौक था, लेकिन बूटकैंप के दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी कला और रुचि को व्यवसायिक रूप देकर स्वरोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है।
बूटकैंप में उन्होंने अपने ऐपन कार्य को एक व्यवसायिक विचार के रूप में प्रस्तुत किया। बिजनेस मॉडल कैनवास की सहायता से तैयार की गई उनकी योजना और प्रभावशाली प्रस्तुति ने निर्णायकों को प्रभावित किया, जिसके बाद उनका चयन 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के लिए हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान मानसी ने ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, उद्यम पंजीकरण, विपणन प्रबंधन और व्यवसाय संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। अपनी मेंटर डॉ. रुचिता पंघुरिया के मार्गदर्शन में उन्होंने “Homies Vibes” नाम से अपना उद्यम शुरू किया।
मानसी के प्रयासों को बड़ी सफलता तब मिली जब फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में उनके उद्यम को ₹75,000 का सीड फंड प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार, उत्पाद विकास और विपणन गतिविधियों को मजबूत बनाने में किया।
आज “Homies Vibes” पारंपरिक उत्तराखण्डी ऐपन कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का सफल प्रयास बन चुका है। मानसी वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग ₹80,000 मूल्य के ऐपण उत्पादों की बिक्री कर रही हैं और अपने ग्राहक आधार का लगातार विस्तार कर रही हैं। उनकी सफलता राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है, जो यह संदेश देती है कि पारंपरिक कला और आधुनिक उद्यमिता का संगम नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

