चिन्हीकरण में देरी और बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भड़के राज्य आंदोलनकारी, 10 जुलाई को डीएम कार्यालय घेरने का ऐलान

चिन्हीकरण में देरी और बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भड़के राज्य आंदोलनकारी, 10 जुलाई को डीएम कार्यालय घेरने का ऐलान
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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से शनिवार को शहीद स्मारक में बैठक आयोजित कर जिलों में राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में हो रही देरी और प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। बैठक में आंदोलनकारियों ने सरकार पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं और शासनादेशों के बावजूद चिन्हीकरण प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का आरोप लगाया।

बैठक का संचालन प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूड़ी तथा अध्यक्षता सुलोचना भट्ट ने की। प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी और पुष्पलता सिलमाना ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा और शासनादेश जारी होने के सात माह बाद भी जिलों में चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिजनों में भारी नाराजगी है। उन्होंने यह भी कहा कि चयनित राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी अब तक नहीं मिल पाया है।

प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, केशव उनियाल और रतन अमोली ने कहा कि शासन ने अब तक जिलों को चिन्हीकरण समिति को अधिकार संपन्न बनाने और प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए हैं, जिससे आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने घोषणा की कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 10 जुलाई को देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
अध्यक्षीय संबोधन में सुलोचना भट्ट ने कहा कि पिछले माह जिलाधिकारी द्वारा चिन्हीकरण प्रक्रिया शुरू कराने और अन्य मांगों पर शासन एवं मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मंच राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों और राज्यहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगा।

बैठक के अंत में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी पार्वती मलियाल (70 वर्ष) के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि पार्वती मलियाल ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान जेल भरो, चक्का जाम और धरना-प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

बैठक में केशव उनियाल, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, गणेश डंगवाल, सुरेन्द्र रावत, सुरेश नेगी, बिल्लू वाल्मीकि, मनोज नौटियाल, अभिषेक कांती, पुष्पलता सिलमाना, अरुणा थपलियाल, राधा तिवारी, यशोदा रावत, राजेश्वरी नेगी, चन्द्रकिरण राणा, पुष्पा रावत, मोनिका लखेड़ा, सुशील विरमानी, सुशील चमोली, सुधीर नारायण शर्मा, दुर्गा ध्यानी, विवेक बलोदी, माहेश्वरी कंडारी, संगीता रावत, मोहन खत्री, विनोद असवाल, क्रांति अभिषेक, प्रभात डंडरियाल, पी.सी. जोशी, उमेश रावत, साबी नेगी, सुलोचना नौडियाल, देवेश्वरी गुसाईं, सुलोचना मेंदौला, आशा नौटियाल, आशा डंगवाल सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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