CBI बैंक फ्रॉड केस में पूर्व DGM समेत छह दोषियों को 10 साल की सजा, 2.70 करोड़ रुपये जुर्माना

चेन्नई।सीबीआई की विशेष अदालत, चेन्नई ने बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में पूर्व डीजीएम समेत छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने यह फैसला 19 अगस्त 2026 को सुनाया।
दोषियों में बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन डीजीएम एन. वेंकटाचलम, शोलींगनल्लूर तालुक कार्यालय के रिकॉर्ड क्लर्क एम. शिवकुमार, पझवनथंगल के तत्कालीन ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) टी. दसरथन, तमिलनाडु सरकार के VAO एम. मणिचवेलु तथा दो निजी व्यक्ति ओ.पी. थामरई पू और पी. थंडापानी शामिल हैं।
सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर 19 मई 2010 को मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुख्य आरोपी ई. मुथुस्वामी और अन्य आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के साथ साजिश कर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न ऋण एवं क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त कीं और बैंक की 2.38 करोड़ रुपये से अधिक (238.97 लाख रुपये) की राशि का कथित रूप से दुरुपयोग कर बैंक को धोखा दिया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 28 दिसंबर 2011 को कुल 12 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें पांच लोक सेवक और सात निजी व्यक्ति शामिल थे।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
सीबीआई के अनुसार, एक लोक सेवक वी. उमापति, तत्कालीन निलंबित सीनियर ड्राफ्ट्समैन, भूमि एवं सर्वेक्षण विभाग के खिलाफ मामला अलग कर CC 18/2016 में चलाया गया। वहीं चार निजी आरोपियों ई. मुथुसामी, ए. विंसेंट, के. श्रीकांत और एम. ज्योति की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए। एक अन्य आरोपी लावण्या को अदालत ने बरी कर दिया।
