राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं पर कैबिनेट बैठक में शामिल न करने से नाराजगी, मंच ने जताया आक्रोश
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के निस्तारण को लेकर सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की है। मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि 11 सितम्बर को आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के निस्तारण के संबंध में मंच को शामिल न किया जाना आंदोलनकारियों की उपेक्षा है।
उन्होंने कहा कि गत स्थापना दिवस पर पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर की गई घोषणा को नौ माह बीत चुके हैं। इस संबंध में दो बार शासनादेश जारी होने के बावजूद अब तक किसी भी जिले में चिन्हीकरण की सूची जारी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि चिन्हीकरण प्रक्रिया की अंतिम तिथि 24 सितम्बर को समाप्त हो रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मंच के महासचिव रामलाल खंडूड़ी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी लगातार उम्रदराज हो रहे हैं और कई मातृशक्तियां चिन्हीकरण की प्रतीक्षा करते हुए दुनिया से विदा हो चुकी हैं, लेकिन सरकार और शासन की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने चिन्हीकरण प्रक्रिया में हो रहे विलम्ब पर चिंता व्यक्त की।
प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके आंदोलनकारियों को भी रोजगार के लिए शासन की ओर देखना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कई अवसरों पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद घोषणाओं पर अमल नहीं होने से राज्य आंदोलनकारियों और शहीद परिवारों में निराशा और आक्रोश है।
उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने कहा कि जल्द ही एक बड़ी बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी और राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
