गड्ढामुक्त सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता से मिला संयुक्त नागरिक संगठन, पांच साल तक ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग

देहरादून। संयुक्त नागरिक संगठन ने राजधानी की बदहाल सड़कों, गड्ढों, ऊंचे-नीचे लोहे के ढक्कनों और सड़क किनारे असमान शोल्डर की समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा से मुलाकात कर स्थायी समाधान की मांग की। संगठन ने कहा कि सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़कों व फुटपाथों पर चलना नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है तथा सड़कों को वर्षभर सुरक्षित रखना सरकारी जिम्मेदारी है।
26 सितंबर को लोक निर्माण विभाग कार्यालय में आयोजित संवाद के दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि दून की खराब सड़कों के कारण विक्रम, थ्री व्हीलर, बाइक और स्कूटी सवारों के साथ-साथ इनमें सफर करने वाले बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को लगातार झटकों और दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने सड़क सुधार को लेकर पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा को मांग पत्र भी सौंपा।
संगठन ने मांग की कि पीडब्ल्यूडी के नियंत्रण वाली सभी सड़कों का क्षेत्रवार सर्वे कराया जाए। सर्वे में सड़क का नाम, उसकी लंबाई, गड्ढों की संख्या, टूटे किनारे, जलभराव और असमान रोड शोल्डर का विवरण फोटो, वीडियो और स्थान की जानकारी के साथ दर्ज किया जाए। गड्ढों की केवल खानापूर्ति के बजाय वैज्ञानिक तरीके से टिकाऊ मरम्मत की जाए। इसके लिए उचित कटिंग, सतह की तैयारी, गर्म मिश्रण, दबाव देकर समतलीकरण और सीलिंग की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि सड़क की ऊपरी सतह में बने गड्ढों को चौकोर आकार में काटकर मिट्टी व अन्य सामग्री को पूरी तरह साफ करने के बाद गर्म मिश्रण से भरा जाए। जहां गड्ढे सड़क की पत्थर वाली आधार सतह तक पहुंच गए हों, वहां पर्याप्त गहराई तक कटिंग कर पत्थर भरने के बाद गर्म मिश्रण से पैचवर्क किया जाए।
मुख्य सड़क और दोनों ओर के कच्चे अथवा पक्के शोल्डर का स्तर यथासंभव समान रखने, निर्माण एवं मरम्मत सामग्री की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच कराने तथा कार्य पूरा होने के बाद निर्धारित अवधि तक संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की मांग भी रखी गई। अस्पतालों, स्कूलों, बुजुर्गों की आवाजाही वाले क्षेत्रों और अधिक यातायात वाले मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने की बात कही गई।
संगठन ने विभिन्न विभागों द्वारा सड़क खोदने के बाद उसकी समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी तय करने तथा नागरिकों की शिकायतों के लिए ‘सड़क समस्या समाधान पंजिका’ तैयार कर प्रत्येक शिकायत को क्रमांक देने और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने का सुझाव दिया।
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा ने बताया कि नई पीबीएमसी व्यवस्था के तहत ठेकेदार को केवल सड़क निर्माण के लिए नहीं, बल्कि उसे सभी मौसम में बेहतर स्थिति में बनाए रखने के आधार पर भुगतान किया जाएगा। ठेकेदार की पांच वर्ष तक सड़क को सुविधाजनक बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। सड़क पर गड्ढे अथवा जल निकासी व्यवस्था बाधित होने पर दो दिन के भीतर उसे ठीक करना होगा। उन्होंने कहा कि एक बार में मजबूत और टिकाऊ कार्य कराना ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी।
प्रमुख अभियंता ने बताया कि सड़कों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था का उपयोग किया जाएगा। निगरानी के लिए स्वतंत्र पर्यवेक्षण सलाहकार की नियुक्ति भी की जा रही है। संगठन ने नई निगरानी व्यवस्था का स्वागत करते हुए इसमें सामाजिक संस्थाओं और जनसहभागिता को भी शामिल करने का सुझाव दिया।
संगठन की ओर से दून के विभिन्न क्षेत्रों की खराब सड़कों से जुड़े कई मामले पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता के समक्ष रखे गए, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
शिष्टमंडल में बिपिन चंद्र शर्मा, रोहित कोचवे, गिरीश चंद्र भट्ट, उमेश सक्सेना, प्रदीप कुकरेती, सुशील त्यागी, अवधेश शर्मा, अमर सिंह धुनता, मोहन खत्री और दिनेश भंडारी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
