दिल्ली में मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ी, महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक मौका

दिल्ली में मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियों की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ी, महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक मौका
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नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आयोग ने ऐसे मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान करने का निर्णय लिया है, जिन्हें एसआईआर के दौरान अनमैप्ड अथवा तार्किक विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किया गया है।

आयोग के अनुसार, ऐसे मतदाताओं के घर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) मामले पर निर्णय लेंगे। ऐसे मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में ईआरओ या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में ईआरओ के निर्णय के अनुसार सुनवाई की जा सकेगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकेगा। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारियों को रात्रि आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब, बेघर और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र स्थापित करने तथा विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा पत्र को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया है। वहीं, एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत लागू प्रपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा।

ईसीआईनेट प्रणाली को लेकर आयोग ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुरूप भूमिका-आधारित पहुंच प्रदान की गई है। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति ईसीआईनेट की समीक्षा करेगी। समिति में आईआईटी या आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति यह जांचेगी कि प्रणाली संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर पोर्टल में पिछले कुछ महीनों में कई सुधार किए जा चुके हैं।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। वहीं महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 तथा उनके निस्तारण की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

आयोग ने यह भी निर्णय लिया कि उसकी सभी बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही का विवरण जारी किया जाएगा। अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के भीतर, यानी प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा तथा आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर पूरा हो चुका है। एसआईआर के दौरान या उसके बाद जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे संबंधित ईआरओ के समक्ष निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति अथवा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से संबंधित था। आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण संबंधी आदेश दो आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे और सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग की निगरानी से संबंधित व्यवस्था भी वापस नहीं ली गई थी।

आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू करने का आदेश आयोग की सर्वसम्मत स्वीकृति से जारी किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल किया गया। आयोग के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के आदेश में एसआईआर को बरकरार रखा है। शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या स्पष्ट होगी।
गोवा में छूटे हुए मतदाताओं के घर-घर जाकर प्रपत्र एकत्र करने के निर्देश संबंधित बीएलओ को दिए गए हैं। आयोग के अनुसार 97 में से 81 मतदाता नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं।

देवभूमि खबर

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