पैनकार्ड क्लब्स मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 646.58 करोड़ की 211 अचल संपत्तियां कुर्क

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय-1 ने पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड एवं अन्य के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत करीब 646.58 करोड़ रुपये मूल्य की 211 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। कुर्क की गई संपत्तियों में व्यावसायिक कार्यालय, आलीशान होटल, संचालित रिसॉर्ट, कृषि भूमि और आवासीय संपत्तियां शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना तथा दादरा एवं नगर हवेली में स्थित हैं। संपत्तियां पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड, पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड, उनकी विभिन्न सहायक कंपनियों के अलावा संबंधित परिवार के सदस्यों और वास्तविक लाभार्थी स्वामियों के नाम पर दर्ज हैं।
ईडी ने पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड एवं अन्य के खिलाफ मुंबई के दादर थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी। बाद में मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा, मुंबई पुलिस को सौंपी गई। आर्थिक अपराध शाखा ने 31 दिसंबर 2021 को विशेष एमपीआईडी न्यायालय, मुंबई के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया था।
ईडी की जांच में सामने आया कि मामले से जुड़े लोगों ने पैनोरमिक समूह के तहत 46 कंपनियों का नेटवर्क बनाया था। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से ‘रूम नाइट्स की बिक्री’ और टाइमशेयर अवकाश सदस्यता की आड़ में अवैध पोंजी योजनाएं संचालित की गईं। इन योजनाओं के माध्यम से देशभर में 51 लाख से अधिक निवेशकों को अवास्तविक रिटर्न का भरोसा देकर धन एकत्र किया गया।
जांच के अनुसार, पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड ने वर्ष 1997-98 से 2017-18 के बीच निवेशकों से कुल 9,577 करोड़ रुपये एकत्र किए। इसमें से 2,858 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं को वापस किए गए, जबकि 2,332 करोड़ रुपये एजेंटों को कमीशन के रूप में दिए गए। शेष 4,387 करोड़ रुपये को अपराध से अर्जित आय बताते हुए ईडी ने कहा कि इस राशि को आरोपित कंपनियों और प्रमुख व्यक्तियों द्वारा अपने पास रखा गया तथा दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया।
ईडी की जांच में यह भी पता चला कि अपराध से अर्जित धन को विभिन्न मुखौटा और फर्जी कंपनियों के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाया गया। इनमें शगुन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य कंपनियां शामिल थीं। इसके बाद यह धन पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड और उसकी देश-विदेश में स्थित सहायक कंपनियों में लगाया गया। इस धन का इस्तेमाल देश और विदेश में महंगी अचल संपत्तियों, रिसॉर्ट और व्यावसायिक परिसरों की खरीद में किया गया। इन संपत्तियों को समूह की कंपनियों, निदेशकों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर रखकर कथित तौर पर वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया गया।
जांच के दौरान कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पहले से कुर्क संपत्तियों को कथित तौर पर अवैध तरीके से हस्तांतरित करने का प्रयास भी सामने आया। रायगढ़ के पनवेल स्थित कल्हे गांव में 7.08 हेक्टेयर भूमि को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा एमपीआईडी सक्षम प्राधिकरण के पूर्ववर्ती कुर्की आदेशों के बावजूद कथित रूप से अनधिकृत तरीके से बेच दिया गया। ईडी के अनुसार, यह लेनदेन एक ऐसी कंपनी की ओर से फर्जी निदेशक मंडल प्रस्ताव के माध्यम से किया गया, जिस पर एक दिवंगत निदेशक उषा अरुण तारी के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। उषा अरुण तारी का निधन 11 सितंबर 2018 को हो चुका था।
संपत्तियों के आगे अवैध हस्तांतरण को रोकने के लिए ईडी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत तत्काल अस्थायी कुर्की की कार्रवाई की है।
इससे पहले ईडी ने वर्ष 2025 में पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड की विदेशी सहायक कंपनियों तथा दिवंगत सुधीर मोरवेकर से संबंधित अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और थाईलैंड में स्थित 30 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया था। इन संपत्तियों का मूल्य करीब 54.31 करोड़ रुपये था। इस कुर्की की पुष्टि पीएमएलए के निर्णायक प्राधिकरण ने 9 अक्टूबर 2025 को की थी।
ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत अब तक अस्थायी रूप से कुर्क अपराध से अर्जित आय की कुल कीमत करीब 700.89 करोड़ रुपये हो गई है।
