एलआईसी के 6.37 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ा फैसला, सहायक को 10 साल की कठोर कैद

एलआईसी के 6.37 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ा फैसला, सहायक को 10 साल की कठोर कैद
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लखनऊ। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत, लखनऊ ने एलआईसी में करीब 6.37 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले के मामले में एक लोक सेवक समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को तत्कालीन उच्च श्रेणी सहायक पंकज सक्सेना को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

मामले में तीन निजी आरोपियों प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने तीनों पर 1.25-1.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सीबीआई ने एलआईसी के जानकीपुरम स्थित ट्रांसगोमती शाखा के मुख्य प्रबंधक की शिकायत के आधार पर 13 अगस्त 2012 को मामला दर्ज किया था। आरोप था कि फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत फर्जी और अस्तित्वहीन पॉलिसीधारकों के नाम पर भुगतान वाउचर और चेक तैयार किए तथा एलआईसी की धनराशि को धोखाधड़ी से दूसरी जगह स्थानांतरित किया।

जांच के अनुसार, इस फर्जीवाड़े से एलआईसी को करीब 6,37,66,660 रुपये की वित्तीय क्षति हुई। मामले में एलआईसी की ट्रांसगोमती शाखा, जानकीपुरम में तैनात अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 21 अगस्त 2014 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।

देवभूमि खबर

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