अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने समाजसेवी मोहन खत्री को किया सम्मानित, 154 रक्तदान शिविरों का उल्लेख

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर गुरुवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला, गढ़ी कैंट में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान एवं सहभागिता को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड की ओर से आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए समाजसेवी मोहन खत्री को सम्मानित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, ज्ञान और सामाजिक योगदान को सम्मान देने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखना रहा। वक्ताओं ने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का वह पड़ाव है, जहां उम्र के साथ प्राप्त अनुभव और जीवन की समझ समाज के लिए और अधिक मूल्यवान हो जाती है। वरिष्ठ नागरिक वह पीढ़ी हैं, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने में लगाया है।
समारोह में वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय सामाजिक भूमिका पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बुजुर्गों को केवल सहायता की आवश्यकता वाले वर्ग के रूप में देखने के बजाय उनके अनुभव और ज्ञान का उपयोग सामाजिक विकास में किया जाना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय सहभागिता नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
समाजसेवी मोहन खत्री लंबे समय से सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके प्रयासों से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में अब तक 154 रक्तदान शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। कोरोना संक्रमण के कठिन दौर में उन्होंने लगातार 45 दिनों तक जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए भंडारे का आयोजन कर भोजन उपलब्ध कराया। इसके अलावा उनके प्रयासों से 35 निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए गए, जिनमें लोगों को स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
कार्यक्रम में कहा गया कि उम्र सामाजिक जिम्मेदारियों से दूरी का कारण नहीं होनी चाहिए। वरिष्ठ नागरिक आज भी स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सेवा, जनजागरूकता और विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सीनियर सिटीजन सोसायटी, प्रेमनगर की ओर से भी वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद मोहन खत्री ने कहा कि वृद्धजन दिवस का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बुजुर्गों को परिवार और समाज में सम्मान, सुरक्षा, समय और आत्मीयता मिलना जरूरी है। वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा का समन्वय समाज को नई दिशा दे सकता है।
