मुजफ्फरनगर गोलीकांड के शहीदों को राज्य आंदोलनकारियों ने दी श्रद्धांजलि, न्याय को लेकर उठी आवाज

मुजफ्फरनगर गोलीकांड के शहीदों को राज्य आंदोलनकारियों ने दी श्रद्धांजलि, न्याय को लेकर उठी आवाज
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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से शुक्रवार, 2 अक्टूबर को शहीद स्मारक पर मुजफ्फरनगर गोलीकांड के शहीदों की शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा एवं न्याय गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय ‘सजा कब तक?’ रखा गया। राज्य आंदोलनकारियों ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखण्ड के निर्माण और विकास का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन पूरण सिंह लिंगवाल ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने की।

इस अवसर पर रवीन्द्र जुगरान, जगमोहन सिंह नेगी एवं जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि राज्य आंदोलन के 32 वर्ष बाद भी मुजफ्फरनगर गोलीकांड के दोषियों को सजा नहीं मिल पाना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के जिन सपनों और मांगों को लेकर आंदोलन हुआ था, वे भी पूरी तरह साकार नहीं हो सके हैं। इनमें शहीदों को न्याय दिलाना, स्थायी राजधानी, मजबूत भू-कानून, मूल निवास, रोजगार नीति तथा पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रमुख हैं।

प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, जयदीप सकलानी एवं द्वारिका बिष्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों को भी व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राज्य की वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र की योजनाओं को आधार बनाकर विकास की दिशा तय करने के बजाय हिमालयी राज्य और विशेष रूप से देवभूमि उत्तराखण्ड के पहाड़, जल, जंगल और स्थानीय परिस्थितियों पर गंभीर शोध के आधार पर नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

गणेश डंगवाल, पुष्पलता सिलमाणा एवं विवेकानन्द खंडूड़ी ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन शहीदों को न्याय दिलाने के मामले में अब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को विद्यालयों में राज्य आंदोलन का इतिहास पढ़ाने की जरूरत है। शहीदों के नाम पर सड़कों, भवनों और अन्य संस्थानों का नामकरण भी किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार पर कड़ी चोट किए बिना शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना संभव नहीं है।

श्रद्धांजलि सभा में शहीद राजेश रावत की माता आनन्दी रावत सहित केशव उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, विवेकानन्द खंडूड़ी, रवीन्द्र जुगरान, जनकवि डॉ. अतुल शर्मा, रामलाल खंडूड़ी, पूरण सिंह लिंगवाल, प्रदीप कुकरेती, ललित जोशी, मोहम्मद शाहिद, पी.एस. प्याल, विशम्भर दत्त बौंठीयाल, यशवंत सिंह रावत, जयदीप सकलानी, सुरेश नेगी, मोहन थापा, चन्द्र किरण राणा, गणेश डंगवाल, अजय डबराल, प्रताप रावत, सुरेन्द्र रावत, मनोज नौटियाल (गोल्डी), धर्मानन्द भट्ट, मनमोहन नेगी, ध्यान पाल बिष्ट, बीर सिंह रावत, पुष्कर बहुगुणा, आकाश रावत, प्रेम बहुखंडी, सुदेश सिंह, मोहन खत्री, प्रभात डण्डरियाल, कलम गुसांई, तुलाराम बड़वाल, संतन रावत, पुष्पलता सिलमाणा, राजेश्वरी परमार, यशोदा रावत, राधा तिवारी, राजेश्वरी नेगी, हरी सिंह मेहर, विरेन्द्र रावत, विनोद असवाल, प्रभाकर डबराल, सतेन्द्र नौगांई, बलबीर सिंह नेगी, सुशील विरमानी, बृजेश कुमार, सुधीर नारायण शर्मा, अब्बल सिंह नेगी, कुलदीप कुमार, द्वारिका बिष्ट, रामेश्वरी नेगी, रंजना शर्मा, रेखा शर्मा, तारा पाण्डे, रामेश्वरी बड़थ्वाल, रेवती बिष्ट, पुष्पा रावत, महेश्वरी कण्डारी, सुशीला चन्दोला, दुर्गा ध्यानी, संगीता रावत, क्रांति अभिषेक, द्विज बहुगुणा, गोविन्द सिंह गुसाईं, राजेश पान्थरी, विपिन मलोड़ी, बिल्लू वाल्मीकि, सुशील बलूनी, उमेश रावत, दिनेश जोशी, साबी नेगी, सुलोचना नोडियाल, राकेश नौटियाल, सुमति पडियार, दुर्गा बहादुर क्षेत्री, गीता नेगी, रेणुका पन्त, सुलोचना मेंदौला, गुरदीप कौर, आशा नौटियाल, बीरा रावत, सुबोधनी बट्ट, विपिन नेगी, विमला पंवार, नरेश पंत, नरेन्द्र नौटियाल सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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