जीबी पंत विवि और धानुका एग्रीटेक ने किसानों को कीट के खतरे के बारे में जागरूक किया
पंतनगर।देवभूमि खबर। अग्रणी कृषिरसायन कंपनी धानुका एग्रीटेक लिमिटेड और गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने भारतीय किसानों के सामने आने वाले फाल आर्मीवर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रुगिपेर्डा) के खतरे से निपटने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का आयोजन सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत आज यहां किया गया।
फाल आर्मीवर्म एक आक्रामक कीट है जो मक्का की फसल पर हमला करता है। इसके चलते पिछले साल देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। इसे सबसे पहले कर्नाटक में देखा गया था और फिर धीरे-धीरे यह कई अन्य राज्यों में फैल गया। यह मक्का किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। इस कार्यशाला में वैज्ञानिकों, विषय विशेषज्ञों, किसानों, वितरकों, कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों, कृषि विज्ञान केंद्र और राज्य के कृषि विभाग आदि ने इस परजीवीध्कीट की समस्या और इससे निपटने के सबसे अच्छे कृषि रसायन पर चर्चा की। इस अवसर पर धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के वरीय महाप्रबंधक अशोक महाजन ने कहा, “सरकार कृषि और किसानों की बेहतरी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। धानुका एग्रीटेक ने पैदावार बढ़ाने के लिए प्रासंगिक समाधान देते हुए हमेशा कृषक समुदाय की मदद की है। पिछले साल किसानों की मेहनत को बर्बाद कर देने वाला फाल आर्मीवर्म एक बड़ा खतरा बन गया है। चूंकि यह कीट बहुत तेजी से अपनी तादाद बढ़ाता है, इसलिए अब बहुत जरूरी हो गया है कि संबंधित पक्षों को इसके नुकसानदेह असर और इससे निपटने के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाए। हम भारत के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।” भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इस कीट के नियंत्रण के लिए 3 रसायनों के इस्तेमाल की सिफारिश की है – स्पिनेटोरम 11.7ः एससी (धानुका ब्रांड नाम लार्गो), क्लोरेंट्रानिलिप्रॉल 18.5ः एससी (धानुका ब्रांड कवर) और थियोमेथोक्सेम (धानुका ब्रांड नाम ईएम-1)। अपनी विभिन्न पहलों के जरिए धानुका एग्रीटेक लिमिटेड 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे पहले भी कंपनी ने किसानों को फसल में बढ़ोतरी करने वाली नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए भारत भर में सेमिनार आयोजित किए हैं।

