बच्चों ने जल संरक्षण पर माॅडल प्रदर्शनी कीआयोजित
रुड़की।देवभूमि खबर। जल हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक है इसके बिना हमारा जीवन विलुप्त हो जाएगा इसलिए हमें जितना हो सके उतना जल का संरक्षण करना चाहिए। जिस दिन जल की समाप्ति होगी उसी दिन पृथ्वी पर से सजीव प्राणियों की भी मृत्यु हो जाएगी। इसीलिए अभी से जल का संरक्षण करना आत्याधिक जरुरी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 रूडकी में आज जल संरक्षण दिवस का आयोजन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि वैज्ञानिक (जी) डॉ विकास गोयल रहे।
इस मौके पर बच्चो ने जल संरक्षण से संबधित स्लोगन और कविताएँ लिखी। बारिश के पानी को किस तरह बचा कर घर के अन्य कार्यों के लिए उपयोग में ला सकते हैं इससे सम्बंधित मॉडल बनाए। बच्चों जल को और किस तरह से संरक्षित कर सकते हैं इस को जानने हेतु बच्चो ने जल को कैसे संरक्षित किया जाए इस पर भाषण दिया। मुख्य अतिथि डॉ विकास गोयल ने कक्षा 12 के छात्र छात्राओ को संबोधित करते हुए कहा कि जलसंकट से जुड़ा एक पहलू यह भी है कि जब पहाड़ों पर हरियाली घटती है तो वहाँ बरफ के जमाव तथा वहाँ की नमी में कमी आ जाती है। इसी तरह मैदानों और पठारों पर जब वनस्पतियाँ घटने लगती हैं तो यहाँ औसत वर्षा की मात्रा में क्रमिक रूप से ह्रास होने लगता है। इसका सीधा असर भूमिगत जल के स्तर पर पड़ता है क्यौंकि जहाँ वर्षा कम होगी, तालाबों, गड्घ्ढों और झीलों में जल जमाव कम होगा, वहाँ भूमिगत जल का स्तर भी घटेगा। इस तरह देखें तो पर्यावरण का एक पहलू उसके दूसरे पहलू से जुड़ा हुआ है। ज्यों-ज्यों मानव पर्यावरण की उपेक्षा करेगा त्यों-त्यों उसे जलसंकट, वायुसंकट जैसे कई संकटों का सामना करना पड़ेगा। पानी को किस तरह से बड़ी आसानी से बचाया जा सकता है, इसके कई रास्ते निचे बताये गए है। घर का एक सदस्य दिन में करीब 240 लीटर का इस्तेमाल करता है। चार लोगो का एक परिवार दिन में करीब 960 लिटर पानी और एक साल में करीब 3,50,400 लीटर पानी का इस्तेमाल करता है।
मगर इसमेसे केवल 3ः पानी का इस्तेमाल पिने के लिए और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और बाकी का 97ः पानी का इस्तेमाल पौधों के लिए, टॉयलेट, नहाने के लिए, लांड्री और शोवेरिंग में किया जाता है। पानी बचाने के कुछ आसन तरीके निचे दिए है।सभी ने खुद की जिम्मेदारी को समझते हुए पानी का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए और पानी की बचत करनी चाहिए।जिस पानी का इस्तेमाल हम बाग, टॉयलेट, और साफसफाई के लिए करते है, उसमे से अगर थोड़ासा पानी बचाया जाए तो बहुत कुछ पानी बचाया जा सकता है।बारिश से मिलने वाले पानी को हम टॉयलेट धोने के लिए, लांड्री, बाग के पौधे को पानी देने के लिए और शोवेरिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। टॉयलेट और शावर का इस्तेमाल करते वक्त भी हम जल की बचत कर सकते है। उन्होंने विद्यार्थियों को जल संरक्षण के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग कैसे किया यह भी बताया। प्राचार्य वी.के त्यागी ने सभी को संबोधित करते हुए बताया कि जल ही जीवन है इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं है क्योंकि धरती पर सभी जीवित प्राणियों के लिए जल अमृत के समान है. जल के बिना धरती के किसी भी प्राणी का जीवन संभव नहीं है. हमारी धरती पर वैसे तो 70 प्रतिशत जल ही है। लेकिन मनुष्य के लिए पीने लायक जल केवल 2ः ही है जो कि हमें भूमिगत, नदियों, तालाबों और वर्षा के पानी से उपलब्ध होता है. लेकिन दिनों दिन वर्षा की कमी के कारण भूमिगत जल में कमी आ गई है जिसके कारण पूरे विश्व में पानी की किल्लत हो गई है और अगर इसी तरह जल का दुरुपयोग होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जल की कमी से पूरी पृथ्वी तबाह हो जाएगी।

