ट्यूमर के शुरुआती चरण में ही निदान से उपचार प्रक्रिया में मदद मिल सकती है :डॉ आदित्य
देहरादून।देवभूमि खबर। पिट्यूटरी ग्रंथि के ठीक से कार्य नहीं करने पर आमतौर पर अत्यधिक या कम हार्मोन का उत्पादन होता है जिसके कारण पिंड (मास) बनने का खतरा पैदा हो जाता है। इस पिंड को ट्यूमर कहा जाता है जो कैंसर रहित (बिनाइन) या कैंसर युक्त (मैलिग्नेंट) हो सकता है। इस ग्रंथि में ऐसे ट्यूमर अंतः स्रावी तंत्र और पिट्यूटरी ग्रंथि के सामान्य कामकाज में हस्तक्षेप करके कई गंभीर चिकित्सीय समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
एग्रीम इंस्टीच्यूट फॉर न्यूरो साइंसेस के न्यूरोसर्जरी के निदेशक डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा, ‘‘हालांकि 30 साल की उम्र के बाद ट्यूमर की घटना होने की अधिक संभावना होती है, लेकिन यह कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। रोगी की जीवित रहने की दर ट्यूमर के जटिल स्थान पर होने के अलावा, रोगी की उम्र, ट्यूमर के आकार और प्रकार जैसे अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है। ज्यादातर, पिट्यूटरी ग्रंथि ट्यूमर कैंसर रहित होते हैं लेकिन इसके सटीक कारण अज्ञात हैं। उनमें से कुछ वंशानुगत होते हैं और कुछ दुर्लभ अनुवांशिक विकार के कारण होते हैं जिन्हें मल्टीपल इंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1 कहा जाता है। यह डिसआर्डर भी 3 अलग-अलग अंतःस्रावी-संबंधित ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता या ग्रंथियों के बड़े होने का कारण बन सकता है, जिसमें पिट्यूटरी ग्रंथि भी शामिल है।’’
ट्यूमर के शुरुआती चरण में ही निदान से उपचार प्रक्रिया में मदद मिल सकती है। इस अवस्था में ट्यूमर का पता चल जाने पर साइबरनाइफ नामक अग्रिम तकनीक के उपयोग से पूरी तरह नॉन- इंवैसिव विधियों से इसका इलाज किया जा सकता है। साइबरनाइफ सबसे उन्नत विकिरण चिकित्सा है, और यह पूरी तरह से नॉन- इंवैसिव थेरेपी है जिससे बिनाइन के साथ-साथ मैलिग्नेंट ट्यूमर का उपचार किया जा सकता है। यह थेरेपी 2 सेंटीमीटर से कम आकार वाले कुछ पिट्यूटरी ट्यूमर के लिए बेहद कारगर साबित होती है और शुरुआती चरण के प्राथमिक और चिकित्सकीय रूप से अक्षम ट्यूमर से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रभावी तकनीक है। यह उपचार बिल्कुल सुरक्षित है और शरीर में बार-बार होने वाली बीमारी या एक बीमारी वाले मरीजों में भी एक नया विकल्प प्रदान करता है।

