चमोली जनपद में पर्यटन की भरपूर संभावनाएं है :स्वाति भदौरिया
चमोली।अखिल भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली (मानव संशाधन विकास मंत्रालय) के तत्वाधान में ‘‘हिमालयी क्षेत्र की लोक संस्कृति एवं पर्यटन, उत्तराखण्ड के विशेष संदर्भ विषय पर पीजी काॅलेज गोपेश्वर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शनिवार को शुरू हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी चमोली, स्वाति एस भदौरिया ने दीप प्रज्जवलित कर इसका शुभांरभ किया। राष्ट्रीय सेमिनार में पर्यटन, अर्थशास्त्र, वाणिज्य एवं लोक संस्कृति के विषय विशेषज्ञों ने हिमालय की लोक संस्कृति एवं पर्यटन में छुपी अपार सम्भावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के संयोजक ने मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर जोरदार स्वागत किया।
सेमिनार के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने संबोधित करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र की लोक संस्कृति एवं पर्यटन पर विषय पर आयोजित यह संगोष्ठी जनपद चमोली के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण है। कहा कि जनपद की आर्थिकी पूरी तरह से टूरिज्म पर निर्भर है। कहा कि यहाॅ पर केवल यात्रा सीजन में ही लोगों को रोजगार मिल पाता है तथा यात्रा समाप्त होने पर रोजगार भी समाप्त हो जाता है, जो कि एक बडी समस्या है। उन्होंने कहा टूरिज्म को पूरे साल भर चलाने के लिए हम सभी को मंथन करने की आवश्यकता है।
जिले में पर्यावरण, पर्यटक स्थलों एवं स्थानीय उत्पादों की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि चमोली जनपद में कई प्रकार की हिमालयन जड़ी बूटियां पाई जाती है, जिनसें कई गम्भीर बीमारियों का ईलाज भी संभव है। उन्होंने कहा कि यहाॅ के स्थानीय उत्पाद भी पूरी तरह से आर्गेनिक होते है तथा इन सबकी सही तरह से ब्रांन्डिंग एवं मार्केटिंग करके आर्थिकी को बढाया जा सकता है।
जिले में पर्यावरण, पर्यटक स्थलों एवं स्थानीय उत्पादों की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि चमोली जनपद में कई प्रकार की हिमालयन जड़ी बूटियां पाई जाती है, जिनसें कई गम्भीर बीमारियों का ईलाज भी संभव है। उन्होंने कहा कि यहाॅ के स्थानीय उत्पाद भी पूरी तरह से आर्गेनिक होते है तथा इन सबकी सही तरह से ब्रांन्डिंग एवं मार्केटिंग करके आर्थिकी को बढाया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने कहा कि चमोली जनपद में पर्यटन की भरपूर संभावनाएं है। कहा कि टूरिज्म को बढावा देने के लिए हमें यहाॅ की लोक संस्कृति, लोक गाथाएं, कहानियां, सभ्यता, पारम्परिक परिधान आदि के बारे में लोगों तक जानकारी देते हुए अन्य सभी जरूरतों को भी टूरिज्म से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हिमालयन जड़ी बूटियों एवं स्थानीय उत्पादों से विभिन्न प्रोडेक्ट तैयार करने का कार्य शुरू भी किया गया है लेकिन अभी इसको और बढाने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने सेमिनार में आए बुद्विजीवियों को यहाॅ के धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों के बारे में भी बारीकी से जानकारियां देते हुए उनके महत्व को समझाया।
जिलाधिकारी ने काॅलेज के सभी छात्र-छात्राओं को सेमीनार का भरपूर फायदा उठाकर आने वाले समय में टूरिज्म के विकास में अपना योगदान करने को कहा। इस दौरान जिलाधिकारी ने डा0 शिवचन्द सिंह रावत एवं डा0 मनोज कुमार उनियाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ऐतिहासिक पर्यटन‘‘ का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर आर.के. गुप्ता, संयोजक डा0 एसके ला, विशिष्ट अतिथि प्रोफे0 बीएल शाह, नेशनल काउसिंलिंग आॅफ एप्लाइड इकाॅनोमिक रिसर्च, दिल्ली के वरिष्ठ कार्यपालक व मुख्य वक्ता प्रोफे0 डा. दलीप कुमार, डा0 प्रदीप केशरवानी, डा0 विश्वनाथ, विभिन्न राज्यों एवं जिलों से आए विषय विशेषज्ञ तथा काॅलेज के छात्र-छात्राएं मौजूद थी।

