परमार्थ निकेतन में आयोजित निःशुल्क एक्युपैंचर एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर का समापन हुआ

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ऋषिकेश।देवभूमि खबर। परमार्थ निकेतन धर्मार्थ चिकित्सालय, परमार्थ निकेतन में आयोजित पांच दिवसीय निःशुल्क एक्युपैंचर एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर का समापन हुआ। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी, डाॅ सामी रंैक, डाॅ कैथरीन शुलमैन और अमेरिका से आये अन्य प्रसिद्ध एक्युपंचर और नेचुरोपैथी विशेषज्ञों ने विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर शिविर का समापन किया।

नवरात्रि के अवसर पर परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने राजाजी नेशनल पार्क मार्ग पर स्वच्छता अभियान चलाया। स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि, नव सृजन का पर्व है। यह पर्व हमें नवीन विचारों और नये कार्यो को सकारात्मक दृष्टि से करने की प्रेरणा प्रदान देता है। उन्होने कहा कि आज पूरे देश में देवी की प्रतिमा की स्थापना हो रही है श्रद्धालु नौ दिनों तक हर्ष-उल्लास के साथ भाव भक्ति से देवी का पूजन करेंगे परन्तु हमें उसके साथ एक शिक्षा भी लेनी है कि जिस प्रकार देवी के चरणों में एक राक्षस बैठा होता है उससे हमें शिक्षा मिलती है कि नकारात्मकता को हमेशा दबा कर रखना चाहिये ताकि वह हम पर हावी न हो पाये। पांच दिवसीय एक्युपंैचर और नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर में 500 से अधिक रोगियों की जांच कर चिकित्सा प्रदान की गयी। परमार्थ निकेतन के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ रवि कौशल ने बताया कि शिविर में प्रतिदिन 50 से 60 रोगियों का प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से इलाज किया जा रहा था। चिकित्सा शिविर निःशुल्क था। उन्होने बताया कि शिविर में जोड़ो का दर्द, बीपी, मधुमेह, पीठ और कंधे का दर्द आदि रोगों से ग्रस्त रोगियों की संख्या अधिक थी। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि एक्युपैंचर एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति भारत की पुरानी और वैज्ञानिक युक्त चिकित्सा पद्धति है। इससे न केवल रोगों का इलाज किया जाता है बल्कि यह चिकित्सा पद्धति आरोग्य भी प्रदान करती है और शरीर को जीवंत बनायें रखती है। यह चिकित्सा पद्धति वैदिक, पौराणिक काल से प्रचलित है, वेदों में भी इसका उल्लेख किया गया है।
स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्राकृतिक चिकित्सा और योग पर गहरी आस्था थी। नैचरोपैथी अर्थात नेचर सेय प्रकृति से सम्बधित। हम जितना प्रकृति से जुड़े रहेगे उतने ही स्वस्थ और जीवंत बने रहेंगे। स्वामी जी ने कहा कि विदेश की धरती से भारत आकर चिकित्सकों का दल सेवा प्रदान कर रहा है, वास्तव में यही सच्ची सेवा है। इस दल ने विगत वर्ष भी परमार्थ निकेतन आकर सेवायें प्रदान की थी।
स्वामी जी ने अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्युपंचर और नेचुरोपैथी विशेषज्ञों को रूद्राक्ष की माला और पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा देते हुये कहा कि शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये स्वच्छ वातावरण और शुद्ध वायु, आॅक्सीजन की जरूरत होती है जो की हमें पेड़ों द्वारा निःशुल्क प्राप्त होती है। अतः अपने लिये व आने वाली संतानों के लिये पौधांे का रोपण अवश्य करेंय योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन में स्थान देंय तनाव से मुक्त होने के लिये ’मेडिसिन नहीं मेडिटेशन’ का सहारा लें।’
डाॅ सामी रैंक ने कहा कि परमार्थ निकेतन गंगा के तट पर आकर सेवा करना, सायंकालीन गंगा आरती और स्वामी जी व साध्वी जी के सत्संग में सहभाग करने से मुझे शान्ति मिलती है यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव है। उन्होने कहा कि अभी तक मैने जिन रोगियों का इलाज किया उसमें सबसे अधिक रोगी एसिडिटी, आर्थराइटिस और स्पांडिलाइटिस के थे। कैथरीन शुलमैन ने कहा कि लोग अक्सर अपने आहार-विहार में संयम नहीं रखते इसलिये आर्थराइटिस जैसे रोगों का सामना करना पड़ता है। उन्होने कहा कि स्वस्थ रहने के लिये आहार और प्रातःकाल की सैर नितांत आवश्यक है इससे हमारे मस्तिष्क में आॅक्सीजन की मात्रा संयमित बनी रही है। अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्युपंचर और नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डाॅ सामी रंैक, डाॅ कैथरीन शुलमैन, माइकल फिलिप्स, किम्बर्ली फिलिप्स, एड्रिएन विल्सन, एडेन डानावी, राहेल फील्ड, डायने ओल्मस्टेड,, रेबेका जाॅनसन, अमांडा फ्रीड, एम्बर ब्लेयर, बहमन शाहलोरी, डेबरा पाॅडजेड, केटी पेंस, किम्बर्ली डयूपाॅन्ट, क्रिस्टिन बिएनवेस्ट, लिंडा डेविस, वेंडी लूमिस अपनी सेवा प्रदान की।

देवभूमि खबर

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