राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले की तैयारियां पूरी
गौचर के प्रसिद्व राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया गया है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देने के लिए कलाकारों से मिले सभी आवेदनों पर गहनता से विचार विमर्श के बाद समिति ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया है। समिति ने सांयकालीन संध्या के कार्यक्रमों में कुछ बदलावा भी किए है। उत्तराखण्ड के पहाडी गीतों के लिए जहाॅ लोक गायक हीरा सिंह राणा के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है वही किशन महिपाल के नाम पर रजामंदी नही बन सकी।
गौचर मेले के पहले दिन स्कूली छात्र-छात्राओं की धूम रहेगी। जबकि पहली सांयकालीन संध्या पर ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेगा। दूसरी संध्या इडिया गाट टैलेंट के प्रसिद्व कलाकार हसन रिजवी की प्रस्तुति ‘आबरा का डाबरा’ तथा भारतीय लोक नृत्य के नाम रहेगी। मेले की तीसरी संध्या पर कवि सम्मेलन तथा लोक गायक हीरा सिंह राणा के पहाडी लोक गीतों धूम रहेगी। वही चैथी संध्या प्रिंयका मेहर के नाम पर भी मुहर लग चुकी है। मेले की पांचवी शाम अमित सागर के ‘गढवाली गीतमाला’ के नाम रहेगी। जबकि आखरी संध्या पर बालीहुड प्ले बैक गायिका श्रद्वा पंडित तथा प्रसिद्व बालीवुड सूफी गायक वारसी बंधु के नाम रहेगी। मेले में दिन के कार्यक्रमों के लिए भी सांस्कृतिक समिति ने अंतिम रूप दे दिया है। इसमें संस्कृति एवं सूचना विभाग के विभिन्न सांस्कृतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों के कार्यक्रम चयन किए गए है। मेला समिति ने बताया कि मेले की गरिमा और आकर्षण ध्यान में रखते हुए सभी की सहमति एवं सुझावों के आधार पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया है।

