उत्तराखण्ड में साहसिक खेलों के लिए पर्याप्त संभावनाएं है : मुख्यमंत्री
पौड़ी। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड को प्रकृति ने सब कुछ दिया है। आज आवश्यकता है तो इन प्राकृतिक सम्पदाओं का सही तरीके से उपयोग हो। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार पर्यटन के क्षेत्र में दुनिया में सबसे अधिक संभावनाएं एडवेंचर के क्षेत्र में है, और इसमें रोजगार की भी अपार संभावनाएं है। उत्तराखण्ड में साहसिक खेलों के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। उत्तराखण्ड में पर्यटन, फिल्म, ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं स्वास्थ्य सुविधाओं पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान है। प्रत्येक जनपद में थीम बेस्ड डेस्टिनेशन विकसित किये जा रहे हैं। पूरे प्रदेशवासियों को अटल आयुष्मान योजना से आच्छादित करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। इसके लिए भारत सरकार की ओर से उत्तराखण्ड को सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य सरकार स्वरोजगार की दिशा में अनेक प्रयास कर रही है। इसके लिए राज्य में सीएम स्वरोजगार योजना शुरू की गई। इसके तहत 150 प्रकार के कार्यों को शामिल किये गये हैं। किसानों को 03 लाख तक का ब्याज मुक्त एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण दे रही है। सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का सभी को फायदा मिले, इसके लिए सभी जिलाधिकारी ब्लाॅक लेबल तक जाकर इन योजनाओं की जानकारी लोगों को देंगे। जिला स्तरीय उच्च अधिकारी ब्लाॅक लेबल पर जाकर सरकार की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे। सीएम हैल्पलाईन नम्बर 1905 पर 65 प्रतिशत लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। सीएम डेशबोर्ड की गतिविधियों की लोगों को भी जानकारी रहे, इसके लिए अगले माह सीएम डेशबोर्ड जनता के लिए खोला जायेगा।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि किसी भी देश, प्रदेश व समाज के विकास के लिए पुरूषों एवं महिलाओं का समान रूप से आगे बढ़ना जरूरी है। प्रदेश का सर्वांगीण विकास तभी होता है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीव्र गति से विकास हो। राज्य सरकार ने कल कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया, उत्तराखण्ड में पति की सम्पति में महिलाओं का सह अधिकार मिले ताकि उन्हें भी सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए लोन लेने में कोई परेशानी न हो। हमें अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। इन उत्पादों को अपग्रेड करना होगा और व्यावसायिक गुण विकसित करने होंगे।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिस प्रकार आज हर घर में गैस का सिलेण्डर पहुंच रहा है उसी तरह 30 किलो घास की गठरी भी तीन साल में हर घर तक पहुंचाने की व्यवस्था किये जाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि आज घास लेने के लिये जहां हमारी माँ बहिने जगंल या अन्य स्थानों पर जाती है तो उन्हें पहाड़ी से गिरने, जंगली जानवरों का एवं नदी में बहने का खतरा बना रहता है। हम उन्हें इन खतरों से भी बचायेंगे तथा घास की व्यवस्था उनके आंगन तक उपलब्ध करायेंगे।

