सरकार उत्तराखंड के छात्रों के हितों कीअनदेखी न करें :विजय कुमार बौड़ाई
देहरादून।उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय कुमार बौड़ाई ने सरकार के राजकीय सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों को श्री देव सुमन विश्वविद्यालय से संबंध न होने की दशा में केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के तहत अनुदान बंद करने का निर्णय कालेजों में कार्यरत हजारों शिक्षको व कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात बताया।
प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि सरकार निरंतर शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गैर जिम्मेदाराना रुख अपना रही है । शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है लेकिन भाजपा सरकार का शराब व खनन जैसे विभागों की तरह ही शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कार्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है । भाजपा सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा कहीं भी नहीं है जबकि सरकार के लिए खनन और शराब महत्वपूर्ण विषय हो गए हैं। प्रदेश के सभी अशासकीय महाविद्यालयों की जो व्यवस्था वर्षों से चली आ रही थी उसको आज एक जनविरोधी सरकार ने खत्म कर छात्रों एवं शिक्षकों व कर्मचारियों का उत्पीड़न शुरू कर दिया है। उपरोक्त सभी महाविद्यालय वर्षों से हेमवती नंदन केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं जबकि वर्तमान में गढ़वाल विश्वविद्यालय पूरे देश में एक बहुत ही अग्रणी एवं उच्च कोटि के केंद्रीय शिक्षण संस्थान की श्रेणी में आता है ,सरकार के इस कदम से प्रदेश के लगभग एक लाख से अधिक छात्रों को केंद्रीय विश्वविद्यालय लेवल की पढ़ाई से वंचित होना पड़ेगा और उनके परिजनों को भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का सपना भी टूटेगा। इसके साथ ही पहाड़ के बच्चों को केंद्रीय विश्वविद्यालय की शिक्षा मिलने की बजाय प्रदेश के बाहर वालों को गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलेगा क्योंकि सभी संबद्ध महाविद्यालयों में यहां के बच्चों के लिए प्रवेश में आरक्षण प्राप्त था लेकिन अब केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय में बाहर के बच्चों को प्रवेश मिल जाएगा। गढ़वाल विश्वविद्यालय का उच्च ग्रेडिंग की यूनिवर्सिटी होने के कारण प्रदेश के इन महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय कालेजों में आसानी से प्रवेश मिल जाता था जो कि अब नहीं मिल पाएगा और इसका खामियाजा उत्तराखंड के बच्चों को भुगतना पड़ेगा। सरकार के इस प्रकार की गलत नीति का खामियाजा उत्तराखंड के नौजवानों छात्रों को भुगतना पड़ेगा और छात्रों को अत्यधिक हानि पहुंचेगी। इसलिए सरकार शिक्षा के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है और स्वयं भ्रमित और दिशाहीन है। पूर्व में उत्तराखंड में खंडूरीजी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस गढ़वाल यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए थे ताकि प्रदेश के छात्रों को अच्छी एवं उच्च स्तर की शिक्षा मिल सके लेकिन आज भाजपा सरकार ने उस नेक कार्य को बढ़िया करने के बजाय प्रदेश के छात्रों के हितों पर घोर कुठाराघात किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल प्रदेश के छात्रों ,शिक्षकों एवं कर्मचारियों के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेगा और इस मुद्दे को जनता के समक्ष ले जाकर एक बड़ा आंदोलन करेगा और सरकार के इस जनविरोधी व पहाड़ विरोधी निर्णय का घोर विरोध करेगा।

