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ह्युमन राईट एंड आरटीआई एसोसिएशन ने की सूबे के मुख्य सचिव सहित नौ अधिकारीयों से डाकपत्थर रोड पर आम के बाग़ के अवैध पातन की शिकायत

ह्युमन राईट एंड आरटीआई एसोसिएशन ने की सूबे के मुख्य सचिव सहित नौ अधिकारीयों से   डाकपत्थर रोड पर आम के बाग़ के अवैध पातन की शिकायत
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विकासनगर। डाकपत्थर मार्ग भूमि संख्या 3216.. 17 मैं चल रहे आम के हरे भरे फलदार वृक्षों के बहुत भारी संख्या में अवैध कटान पर क्षेत्रीय उद्यान अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर प्रकरण की शिकायत ह्यूमन राइट्स एंड आरटीआई एसोसिएशन के महासचिव भास्कर चुग ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव सहित वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, उद्यान विभाग के प्रमुख सचिव, प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक, जिलाधिकारी देहरादून, उप जिलाधिकारी विकासनगर, मुख्य उद्यान अधिकारी देहरादून एवं डीएफओ भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी से स्पीड पोस्ट के माध्यम से कर दी है ।

उक्त सभी अधिकारियों को संबोधित शिकायती पत्र में भास्कर चुग ने कहा कि हमारे द्वारा सूचना दिए जाने के बाद शुक्रवार को क्षेत्रीय उद्यान अधिकारी ने जब 60 से अधिक वृक्षों के पातन की बात को स्वीकार कर लिया तो अभी तक इस प्रकरण में पेड़ काटने वाले ठेकेदार एवं भूस्वामी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज ना करना एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार की आशंका को बल देता है l उन्होंने कहा कि 12 जून को सुबह-सुबह पुनः बगीचे से वृक्षों पर कटर चलने की आवाज आने पर जब से प्रिय उद्यान अधिकारी को सूचना दी गई तो उन्होंने अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लिया जो कि उनके व्यवहार को संदिग्ध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है ।
वर्तमान में भी उक्त स्थान पर रात में चोरी-छिपे लगातार पेड़ों का कटान चल रहा है जिससे क्षेत्र का पर्यावरण खराब हो रहा है। मानव अधिकार कार्यकर्ता भास्कर चुग ने उक्त सभी उच्च अधिकारियों से मांग की कि प्रकरण में मुकदमे दर्ज कर दोषियों को जेल भेजा जाए एवं जिन सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों का दायित्व पेड़ों का बचाना था और वह अपने दायित्व के निर्वहन में असफल रहे उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही की जाए।

भास्कर चुग ने पेड़ काटने पर ₹5000 प्रति वृक्ष की दर से जुर्माना लगाने कि अब तक अपनाई जाने वाली नीति पर भी प्रश्न उठाए. उन्होंने कहा कि हलके जुर्माने की इस नीति के कारण विकास नगर क्षेत्र पूरी तरह से उद्यान विहीन होता जा रहा है।
भागकर चुग ने कहा कि प्रकरण में कार्यवाही नहीं होने पर एसोसिएशन माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य होगी।

देवभूमि खबर

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