बडी हथ चक्की से अपनी मातृभूमि की संस्कृति की यादें ताजा करनी में जुटी है पिथौरागढ़ की शोभा नेगी

बडी हथ चक्की से अपनी मातृभूमि की संस्कृति की यादें ताजा करनी में जुटी है पिथौरागढ़ की शोभा नेगी
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पिथौरागढ़।उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में हथ चक्की के द्धारा मात्र शक्ति दाल दलना , गेहूं, मडुवा, मदिरा की पिसाई इसी हथ चक्की के द्बारा किया करते थे।इस हथ चक्की में दाल,को मुट्ठी से डालकर एक हाथ से हैडिल को घुमा कर दालो के बीच को दला जाता है।दाल को दलकर सूफा से फटक कर साफ करके दाल खाने योग्य बनाया जाता है।।

पिथौरागढ़ जिले के ननोली की रहने वाली शोभा नेगी ने आज भी अपने पैतृक गांव में हथ चक्की छोटी वाली दाल दलने वाली और गेहूं मडुवा मदिरा पीसने के बडी हथ चक्की से अपनी मातृभूमि की संस्कृति की यादें ताजा करनी में जुटी है।
प्राचीन काल से हथ चक्की व हथ बड़ी चक्की से काम होता था। लेकिन शोभा नेगी ने आज भी कुमाऊं मंडल की परंपरा को मध्य नज़र रखते हुए। अपने साथ अपनी बेटी को हथ चक्की से दाल दलना व हथ बड़ी चक्की गेहूं व मडुवा की पिसाई करने को सिखाया।।

प्रताप सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता का कहना है उत्तराखंड में धीरे धीरे हमारी मातृभूमि की संस्कृति व रीति-रिवाज परंपरा लुप्त होते जारहे हैं।लेकिन शोभा नेगी ने आज अपने पैतृक गांव हथ चक्की के द्धारा दालों को दलना व गेहूं मडुवा मदिरा की पिसाई करना नहीं छोड़ा। नेगी ने बताया शोभा नेगी बचपन से उत्तराखंड की संस्कृति व रीति-रिवाज परंपरा पर हमेशा गौर करती रहती है।

देवभूमि खबर

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