बीकेटीसी अध्यक्ष बहस से पीछे हटे, अब दानराशि प्रकरण पर जवाब दे सरकार: गणेश गोदियाल

बीकेटीसी अध्यक्ष बहस से पीछे हटे, अब दानराशि प्रकरण पर जवाब दे सरकार: गणेश गोदियाल
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देहरादून।उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर सार्वजनिक बहस की चुनौती देकर निर्धारित समय पर उपस्थित न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनौती को स्वीकार करते हुए मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे प्रेस क्लब पहुंचकर तथ्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की थी, लेकिन बीकेटीसी अध्यक्ष वहां नहीं पहुंचे।

गोदियाल ने कहा कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर तय समय पर उपस्थित नहीं होता, उसकी विश्वसनीयता स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य नहीं हैं।

उन्होंने भाजपा और बीकेटीसी पदाधिकारियों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। गोदियाल ने कहा कि प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2003 में बीकेटीसी में हुई थी, जबकि वर्ष 2010 में भाजपा सरकार के दौरान उनके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2014 में शासन स्तर पर इसकी स्वीकृति दी गई।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक मुद्दा प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति या नियमितीकरण नहीं, बल्कि बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंदिर की दानराशि की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियां गायब होने जैसी बातें सामने आ रही हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान मंदिर समिति और राज्य सरकार की है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने कार्यकाल में सामने आने वाले गंभीर मामलों से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस नेताओं को विवाद में घसीटने का प्रयास करती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथ्यों के आधार पर किसी भी सार्वजनिक मंच पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन भाजपा को भी अपने कार्यकाल में हुई घटनाओं पर जनता को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में पिछले नौ वर्षों से भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। यदि उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई थी, तो अब तक संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

गोदियाल ने कहा कि देवभूमि की आस्था सर्वोपरि है और मंदिरों की दानराशि, व्यवस्थाओं तथा श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार एवं मंदिर समिति की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

देवभूमि खबर

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